नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फैल रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 30 जून से कागजी नोटों को पूरी तरह बंद करने जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इनकी जगह अब प्लास्टिक के नोट लेंगे। इस खबर ने आम लोगों के बीच 2016 की नोटबंदी की यादें ताजा कर दीं और अफरा-तफरी का माहौल बना दिया।
सरकार ने दावे को बताया फर्जी सोशल मीडिया पर फैल रही इस भ्रामक जानकारी का संज्ञान लेते हुए सरकार की अधिकृत एजेंसी PIB ने स्थिति साफ कर दी है। PIB ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया है कि कागजी नोटों को बंद करने या प्लास्टिक के नोट लाने की खबर पूरी तरह से फेक है। RBI की ओर से ऐसा कोई निर्देश या योजना नहीं है।
PIB की जनता से अपील सरकारी एजेंसी ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी आधारहीन जानकारी पर विश्वास न करें। PIB ने कहा है कि कोई भी जानकारी साझा करने से पहले उसे आधिकारिक स्रोतों से जरूर सत्यापित करें। किसी भी सरकारी योजना या नीति की सही जानकारी के लिए केवल RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
नोट छपाई पर खर्च है बड़ी चुनौती हालांकि, कागजी नोटों को बदलने का दावा भले ही फर्जी हो, लेकिन नोटों के प्रबंधन का मुद्दा गंभीर है। RBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 23.8 अरब मूल्य के पुराने नोटों को नष्ट किया गया है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है।
बढ़ रहा है नोट छपाई का खर्च पुराने नोटों को नष्ट कर नए नोट छापने की प्रक्रिया काफी खर्चीली है। वित्त वर्ष 2025-26 में नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये का खर्च आया है, जो पिछले साल 5,101.4 करोड़ रुपये था। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक के नोट अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं, जिससे छपाई पर होने वाले इस भारी खर्च को कम किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल, अभी ऐसी किसी भी योजना को धरातल पर लाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
Several social media posts are falsely claiming that RBI will withdraw paper currency notes and replace them with plastic currency notes from June 30, 2026.#PIBFactCheck
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) June 9, 2026
❌ This claim is #Fake
✅ According to @RBI, there are no plans to withdraw paper currency notes or… pic.twitter.com/dhZqANjip9
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