पीओके में जनरल डायर जैसा दमन: निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बरसाईं गोलियां
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। अपनी हकों की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने गोलियां बरसाईं, जिससे इलाके में कोहराम मच गया है। रावलकोट और कोटली से आई दिल दहला देने वाली तस्वीरें पाकिस्तान की दमनकारी नीति को उजागर कर रही हैं।

जल्लों का नंगा नाच पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। रावलकोट में हुई हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि सरकारी आंकड़ों के मुकाबले मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा है, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

दमन के पीछे की साजिश इस पूरे विवाद के केंद्र में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का प्रस्तावित लंबा मार्च है। यह मार्च भीमबर से मुजफ्फराबाद तक जाना था, लेकिन प्रशासन ने इसे कुचलने के लिए कमर कस ली। अब तक 200 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा चुका है। कई नेता गिरफ्तारी से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए हैं, लेकिन जनआक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।

असंतोष की असली वजह यह गुस्सा रातों-रात पैदा नहीं हुआ है। PoK की जनता लंबे समय से महंगाई, बिजली की बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और प्रशासनिक उदासीनता से त्रस्त है। साथ ही, विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को समाप्त करने के प्रशासनिक फैसले ने जनता में आग में घी का काम किया है।

मानवाधिकारों का चीरहरण दुनिया के सामने खुद को शांतिदूत बताने वाला पाकिस्तान अपने ही घर में जनरल डायर की भूमिका निभा रहा है। वीडियो साक्ष्यों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे रेंजर्स निहत्थे लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर निशाना बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस क्रूरता को रोकने के लिए कोई आगे क्यों नहीं आ रहा?

भविष्य के लिए चेतावनी PoK में हालात बेहद नाजुक हैं। जुलाई में होने वाले चुनावों से पहले, यह बढ़ता असंतोष सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। यदि सरकार ने समय रहते जनता की बुनियादी मांगों को नहीं सुना, तो यह जन-आंदोलन आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट साबित हो सकता है।

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