इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की योजना ने भारत और इजरायल के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवराज्याभिषेक दिवस के अवसर पर इसकी घोषणा की, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने मानवीय संबंधों का प्रतीक है।
कौन हैं बेने इजराइल समुदाय? यह भारत के सबसे पुराने यहूदी समुदायों में से एक है। लगभग 2,000 साल पहले, उत्पीड़न से बचने के लिए गैलीली क्षेत्र से पलायन कर रहे यहूदी लोगों का एक समूह समुद्री दुर्घटना के बाद कोंकण तट पर बसा था। धीरे-धीरे ये लोग भारतीय संस्कृति और मराठी भाषा में ऐसे घुल-मिल गए कि उन्होंने एक विशिष्ट भारतीय-यहूदी पहचान विकसित की।
शिवाजी महाराज की सेना का हिस्सा थे ये योद्धा इतिहासकारों के अनुसार, बेने इजराइल समुदाय की सैन्य परंपरा अत्यंत समृद्ध थी। 17वीं शताब्दी में, जब शिवाजी महाराज अपना साम्राज्य विस्तार कर रहे थे, तब उन्होंने इस समुदाय के निपुण लोगों को अपनी सेना और विशेषकर नौसेना में शामिल किया था। अरोन चुर्रीकर, सैमुअल और अब्राहम जैसे कई नाम मिलते हैं, जिन्होंने मराठा नौसेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह समुदाय न केवल व्यापार बल्कि सैन्य कौशल के लिए भी जाना जाता था।
ब्रिटिश सेना में भी था दबदबा मराठा काल के बाद, ब्रिटिश भारतीय सेना में भी बेने इजराइल समुदाय का योगदान अविस्मरणीय रहा है। 18वीं और 19वीं शताब्दी में बड़ी संख्या में यहूदी युवाओं ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेवाएं दीं। उन्होंने एंग्लो-मैसूर युद्ध, एंग्लो-मराठा युद्ध और 1857 के विद्रोह जैसे कई ऐतिहासिक अभियानों में अदम्य साहस का परिचय दिया। अपनी अनुशासन प्रियता और शिक्षा के कारण समुदाय के कई लोग उच्च सैन्य अधिकारी भी बने।
इजरायल में बसकर भी नहीं टूटी जड़ें 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद, भारत से हजारों यहूदी परिवार वहां जाकर बस गए। आज इजरायल में बेने इजराइल समुदाय की जनसंख्या 50 हजार से अधिक है। हैरान करने वाली बात यह है कि वहां रहने के बावजूद ये लोग आज भी अपनी भारतीय जड़ों से जुड़े हैं। कई इजरायली परिवारों में आज भी मराठी गीत गाए जाते हैं, भारतीय भोजन बनता है और परंपराओं का पालन किया जाता है।
मित्रता का नया अध्याय मुंबई स्थित इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने कहा है कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत और इजरायल के बीच अटूट मित्रता और सम्मान का प्रतीक है। यह पहल उन ऐतिहासिक पन्नों को फिर से जीवंत कर रही है, जो यह साबित करते हैं कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में रहा है, जहां यहूदी समुदाय ने कभी धार्मिक उत्पीड़न का सामना नहीं किया।
Israel s Consul General in Mumbai, Yaniv Revach, has proposed the installation of a statue of Chhatrapati Shivaji Maharaj in Israel, describing it as a gesture of goodwill and a symbol of the growing friendship between India and Israel.
— DD News (@DDNewslive) June 8, 2026
Speaking on Shivaji Maharaj s coronation… pic.twitter.com/r2UvuhhfIA
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