क्या ममता बनर्जी के हाथ से फिसल रही है सत्ता? टीएमसी में बड़ी बगावत के संकेत
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कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है। विधानसभा चुनावों के बाद से ही पार्टी में जारी इस्तीफों का सिलसिला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के भीतर मची भगदड़ ने ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

दिल्ली में सियासी हलचल, 10 से अधिक सांसदों ने की मुलाकात सबसे बड़ी खबर दिल्ली से आ रही है, जहां टीएमसी के 10 से अधिक बागी सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। यह बैठक स्पष्ट संकेत दे रही है कि दिल्ली में कुछ बड़ा पक रहा है।

किन दिग्गजों ने बनाई दूरी? बागी गुट में काकली घोष दस्तीदार (बारासात), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), शताब्दी रॉय (बीरभूम), असित कुमार मल, बापी हलदर (मथुरापुर), जून मालिया (मेदिनपुर), जगदीश बसुनिया (कूच विहार), कालीपद सोरेन (झारग्राम), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), पार्थ भौमिक (बैरकपुर) और शर्मिला सरकार (बर्दवान पूर्व) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन नेताओं का एकजुट होकर केंद्रीय नेतृत्व से मिलना, टीएमसी के लिए खतरे की घंटी है।

सुखेंदु शेखर राय का बड़ा धमाका इस सियासी भूचाल के बीच दिग्गज राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सोमवार को अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जिस वक्त ममता बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में व्यस्त थीं, ठीक उसी समय उनके सबसे भरोसेमंद गिने जाने वाले नेता ने पार्टी का साथ छोड़ दिया।

यह सिर्फ शुरुआत है टीएमसी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह सिर्फ सुखेंदु की बात नहीं है। सुखेंदु के साथ जैसा व्यवहार किया गया और उन्हें पीछे की कतार में धकेला गया, वह बहुत निराशाजनक था। सुखेंदु ने आज आवाज उठाई है, कल दूसरे सांसद भी ऐसा ही करेंगे।

क्या ढह जाएगा टीएमसी का किला? वर्तमान में पश्चिम बंगाल की 17 राज्यसभा सीटों में से 13 टीएमसी के पास हैं। अगर ये बगावत लोकसभा तक फैलती है, तो संसद में टीएमसी की ताकत काफी कम हो जाएगी। सुखेंदु शेखर राय ने 4 जून को ही चेतावनी दी थी कि टीएमसी के और भी सांसद इस्तीफा देने की कतार में हैं। ममता बनर्जी के लिए अब अपनी पार्टी को बिखरने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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