एलपीजी के बढ़ते दाम: खरगे का मोदी सरकार से तीखा सवाल, पूछा- अब सिलेंडर लेकर सड़क पर क्यों नहीं उतरते भाजपाई?
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नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस (LPG) के दामों में हालिया बढ़ोतरी ने देश में सियासी पारा चढ़ा दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे आम आदमी की रसोई के लिए अग्निपरीक्षा करार दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर के दाम 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये होने के बाद खरगे ने सोशल मीडिया पर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

अगले 4 महीनों में 89 रुपये की वृद्धि खरगे ने अपने पोस्ट में आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मोदी सरकार ने पिछले चार महीनों में ही घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 89 रुपये का इजाफा किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बढ़ती कीमतें आम जनता की रसोई को पूरी तरह भस्म करने पर तुली हुई हैं।

खरगे के तीन तीखे सवाल कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार को घेरते हुए तीन प्रमुख सवाल किए हैं:

  1. ईंधन के दावों का क्या हुआ: खरगे ने पूछा कि संसद में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान 41 देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के जो बड़े दावे किए थे, उनका क्या परिणाम निकला? साथ ही, ग्रामीण इलाकों में आज भी गैस की किल्लत क्यों बनी हुई है?

  2. उज्ज्वला योजना की विफलता: आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में उज्ज्वला योजना के तहत 3.30 करोड़ परिवारों ने एक बार भी सिलेंडर रिफिल नहीं करवाया। खरगे का आरोप है कि यह जनता की आर्थिक तंगी और सरकार की लूट का सीधा नतीजा है।

  3. भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल: खरगे ने भाजपा के उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो यूपीए सरकार के दौरान मामूली वृद्धि पर सिलेंडर लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते थे। उन्होंने पूछा कि पिछले 12 सालों में जब एलपीजी के दाम 530 रुपये बढ़ चुके हैं, तो अब ये नेता मौन क्यों हैं?

क्या है मामला? यह विवाद तब और गहरा गया जब रसोई गैस की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। खरगे का यह बयान सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

फिलहाल, सरकार की ओर से इस पर कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष की यह आक्रामकता आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।

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