जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चार साल पुराने उस राजनीतिक घटनाक्रम पर चुप्पी तोड़ी है, जब वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दहलीज पर थे। गहलोत ने पहली बार खुलकर दावा किया है कि उन्हें अध्यक्ष पद से दूर करने के लिए सोची-समझी साजिश रची गई थी।
हाईकमान ने कर लिया था फैसला गहलोत ने कहा कि जब सोनिया गांधी ने उन्हें अध्यक्ष पद के लिए चुना था, तो उनके इनकार करने का सवाल ही नहीं था। जिस पद पर पंडित नेहरू, सरदार पटेल और महात्मा गांधी जैसे दिग्गज रहे हों, उसे ठुकराने के बारे में वह सोच भी नहीं सकते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आलाकमान का निर्णय हो चुका था।
बदनाम करने की रची गई साजिश पूर्व सीएम ने स्पष्ट किया कि 25 सितंबर के घटनाक्रम के पीछे वे बिल्कुल नहीं थे। उन्होंने इसे एक बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि अचानक ऑब्जर्वर भेजे गए और हालात ऐसे पैदा कर दिए गए कि पूरा दोष उनके सिर मढ़ दिया गया। उन्होंने कहा कि मीडिया और जनता आज भी यह गलतफहमी पाले हुए है कि उन्होंने मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विद्रोह करवाया था।
मैं अनपढ़ नहीं हूं अपनी छवि को लेकर चल रहे दुष्प्रचार पर गहलोत भड़कते हुए नजर आए। उन्होंने कहा, लोग अक्सर सोचते हैं कि मैं कुर्सी बचाने के लिए खेल कर रहा था। मैं अनपढ़ नहीं हूं, मैं पढ़ा-लिखा हूं। और अगर कोई अनपढ़ भी हो, तो भी वह कांग्रेस का अध्यक्ष बन सकता है, जैसा कि अतीत में कामराज जी बने थे। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि उनकी मंशा को उनके ही नेता नहीं समझ पा रहे हैं।
मुझे अब किसी पद का लालच नहीं गहलोत का कहना है कि वे राजनीति में अब अति संतुष्ट स्थिति में हैं। उन्होंने साफ किया कि अब उन्हें किसी पद की कोई भूख नहीं है। उन्होंने अपने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा, मेरी लकीर मिटाने की कोशिश मत करो, अगर दम है तो मुझसे बड़ी लकीर खींचकर दिखाओ।
क्या था वो 25 सितंबर का विवाद? सितंबर 2022 में, जब अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था, तब राजस्थान में कांग्रेस विधायकों के एक समूह ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। उस समय यह संदेश गया था कि गहलोत मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते। आज चार साल बाद, गहलोत ने इस पूरे वाकये को एक सुनियोजित छवि बिगाड़ने का षड्यंत्र करार दिया है।
*25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में:
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 7, 2026
आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं… pic.twitter.com/06nauxjKLx
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