बापूजी केक: 7 रुपये की वह मिठास, जिसने बंगाल की दो पीढ़ियों को जोड़ रखा है
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कोलकाता की तंग गलियों से लेकर चाय की दुकानों तक, एक पीले रंग के साधारण पैकेट में लिपटे बापूजी केक की पहचान किसी परिचय की मोहताज नहीं है। यह केवल एक बेकरी प्रोडक्ट नहीं है, बल्कि बंगाल के करोड़ों लोगों के बचपन की एक मीठी याद है।

1973 में शुरू हुआ सफर बापूजी केक की कहानी 1973 में हावड़ा की एक छोटी बेकरी से शुरू हुई थी। इसे व्यवसायी आलोकेश जाना ने आम लोगों के लिए किफायती और स्वादिष्ट स्नैक के रूप में पेश किया था। उस समय इसकी कीमत मात्र 60 पैसे थी। धीरे-धीरे यह केक हार्डकोर मिडल-क्लास की पहचान बन गया और स्कूल टिफिन से लेकर ट्रेन के सफर तक का साथी बन गया।

क्यों नहीं कम हुई इसकी दीवानगी? आज के दौर में जब बाजार विदेशी डेजर्ट्स और महंगे ब्रांड्स से भरा है, तब भी बापूजी केक की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी ईमानदारी है। न तो इसकी पैकेजिंग में कोई बनावटी बदलाव किया गया और न ही इसके स्वाद में। लोग आज भी वही वैनिला फ्लेवर और टूटी-फ्रूटी वाला केक खाते हैं, जिसे उन्होंने दशकों पहले चखा था।

कोविड काल ने दिखाई इसकी अहमियत कोविड महामारी के दौरान जब बापूजी केक की सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित हुई, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी यादें साझा करना शुरू कर दिया। तब यह स्पष्ट हुआ कि यह केक सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़ा है। उस दौरान लोगों ने महसूस किया कि यह ब्रांड उनके जीवन के हर उतार-चढ़ाव का गवाह रहा है।

GenZ और मिलेनियल्स की नई पसंद यह सोचना गलत होगा कि बापूजी केक सिर्फ बुजुर्गों की पसंद है। आज के कॉलेज जाने वाले छात्र और नई पीढ़ी भी इसे खूब चाव से खाती है। किफायती दाम (मात्र 6-7 रुपये) और इसकी विंटेज अपील युवाओं को आकर्षित करती है। यह ब्रांड न केवल पुरानी पीढ़ी की यादें ताज़ा रखता है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक भरोसेमंद स्नैक बना हुआ है।

52 साल बाद भी बरकरार वही स्वाद वर्तमान में इस ब्रांड की जिम्मेदारी आलोकेश जाना के बेटे अमिताभ और अनिमेष जाना संभाल रहे हैं। उनका मानना है कि कंपनी की सफलता का राज मानवता, निष्ठा और नैतिकता है। बढ़ती महंगाई के बावजूद, उन्होंने ग्राहकों को किफायती दाम पर वही पुरानी गुणवत्ता देने का संतुलन बनाए रखा है। यही कारण है कि आज भी यह केक बंगाल के गलियारों में अपनी मिठास बरकरार रखे हुए है।

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