किम जोंग उन की सीक्रेट मिसाइल फैक्ट्री: दुनिया की नींद उड़ाने वाली तस्वीरें सामने आईं
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उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का खौफनाक ट्रेलर दिखाया है। सरकारी मीडिया ने पहली बार किम की एक ऐसी मिसाइल प्रोडक्शन फैसिलिटी की तस्वीरें जारी की हैं, जिसे अब तक पूरी तरह गोपनीय रखा गया था।

इन तस्वीरों ने अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन देशों की खुफिया एजेंसियां अब प्योंगयांग के इस कदम का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं।

क्या है यह सीक्रेट मिसाइल फैक्ट्री?

सरकारी न्यूज एजेंसी द्वारा जारी तस्वीरों में किम जोंग उन को मिसाइलों के जखीरे के बीच निरीक्षण करते देखा जा सकता है। सुरक्षा कारणों से इसकी लोकेशन का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन तस्वीरों में दिख रही मिसाइलों की तादाद बताती है कि यह उत्तर कोरिया की सैन्य शक्ति का मुख्य केंद्र है।

मिसाइल उत्पादन में 2.5 गुना बढ़ोतरी का लक्ष्य

दौरे के दौरान किम ने अधिकारियों को मिसाइल उत्पादन को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने मौजूदा पांच वर्षीय योजना के तहत सालाना उत्पादन को 2.5 गुना तक बढ़ाने का आदेश दिया है। प्योंगयांग का तर्क है कि क्षेत्रीय तनाव के बीच अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य है।

परमाणु हथियारों पर किम यो जोंग का सख्त रुख

किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया से परमाणु हथियार छोड़ने की उम्मीद रखना दिवास्वप्न है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर कोरिया एक परमाणु शक्ति है और इस सच्चाई को बदला नहीं जा सकता।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्योंगयांग मिसाइल उत्पादन में इतनी बड़ी वृद्धि करता है, तो यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सुरक्षा संतुलन को बिगाड़ सकता है। हालांकि इन मिसाइलों की सटीक मारक क्षमता और रेंज अभी भी एक रहस्य है, लेकिन इनकी संख्या में इजाफा होना ही पड़ोसी देशों के लिए खतरे की घंटी है।

क्या शी जिनपिंग की यात्रा से है संबंध?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मिसाइल फैक्ट्री का यह प्रदर्शन महज संयोग नहीं है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित उत्तर कोरिया दौरे से ठीक पहले प्योंगयांग अपनी ताकत का प्रदर्शन कर यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी भी कूटनीतिक बातचीत में कमजोर पक्ष बनकर नहीं बैठेगा।

किम का यह कदम अंतरराष्ट्रीय दबाव को धता बताते हुए आने वाले समय में एक बड़े टकराव के संकेत दे रहा है।

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