ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान हुए एक बेहद गंभीर हमले का खुलासा किया है। अराघची ने बताया कि 28 फरवरी 2026 को जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय पर हमला हुआ, तब वे खुद उस इमारत के भीतर मौजूद थे।
मलबे के बीच से निकली जान लेबनान के एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि हमले के वक्त स्थिति पूरी तरह अराजक थी। धमाकों के बाद इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, और वे मलबे के बीच से किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे। उनके अनुसार, उस वक्त उनकी प्राथमिकता खुद को बचाना नहीं, बल्कि सर्वोच्च नेता खामेनेई की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
दो दिन तक बना रहा रहस्य विदेश मंत्री ने बताया कि हमले के बाद अगले 48 घंटों तक उन्हें यह पता नहीं चल सका कि खामेनेई किस स्थिति में हैं। इस दौरान वे पूरी तरह अनिश्चितता और तनाव के बीच कार्य करते रहे। उनका पूरा ध्यान लोगों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन व्यवस्था को संभालने पर था।
बंकर में जाने से किया इनकार अराघची ने खुलासा किया कि सुरक्षा एजेंसियों ने खामेनेई को बार-बार बंकर या सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी थी। लेकिन नेता ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब तक देश के आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तब तक वे भी कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था का लाभ नहीं लेंगे। खामेनेई का मानना था कि जनता के साथ जो होगा, वही उनके साथ भी होना चाहिए।
क्षेत्रीय देशों को दी थी चेतावनी अराघची ने बताया कि संघर्ष बढ़ने से पहले उन्होंने खाड़ी देशों का दौरा किया था। उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि यदि ईरान के खिलाफ हमलों के लिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया गया, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने अमेरिकी रणनीति की आलोचना करते हुए कहा कि अगर इन देशों में अमेरिकी अड्डे नहीं होते, तो वे ईरान की जवाबी कार्रवाई का निशाना भी नहीं बनते।
मोजतबा खामेनेई के हाथों में कमान ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर अराघची ने स्पष्ट किया कि अब मोजतबा खामेनेई देश की बागडोर संभाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शासन व्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों पर मोजतबा का मजबूत नियंत्रण है और नए नेतृत्व के साथ सरकारी कामकाज में कोई रुकावट नहीं आई है।
युद्ध की पृष्ठभूमि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे, जिसमें परमाणु और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इसके जवाब में ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV लॉन्च किया था। फिलहाल, 8 अप्रैल से दोनों पक्षों के बीच सीजफायर जारी है, लेकिन मध्य-पूर्व में तनाव अब भी बरकरार है।
Iranian FM Araghchi reveals he survived strikes that killed Ali Khamenei
— RT (@RT_com) June 4, 2026
I WAS EMERGING FROM THE RUBBLE
At the moment of his martyrdom, I was in the office that was attacked
IDF footage: 50 Israeli jets bomb Khamenei s compound pic.twitter.com/9CAxK0t5mW
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