कर्नाटक सरकार में संकट: शपथ के दूसरे दिन ही मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा
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कर्नाटक की नवनिर्वाचित सरकार के गठन के महज 48 घंटे के भीतर ही सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई है। कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है, जिससे कांग्रेस के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर उपजी नाराजगी खुलकर सामने आ गई है।

विभागों के बंटवारे से उपजी नाराजगी रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा विभागों के आवंटन में अनदेखी के चलते हुआ है। रेड्डी अपनी पसंद का बेंगलुरु विकास विभाग चाहते थे, लेकिन उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का जिम्मा सौंपा गया। रेड्डी ने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी विभाग के लिए जिद नहीं की थी, लेकिन मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने का वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया गया।

अंतरात्मा की आवाज पर लिया फैसला इस्तीफे के पीछे की वजह बताते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि वह इस अपमान को सहन नहीं कर सकते। उन्होंने जोर देकर कहा, मैं अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध काम नहीं कर सकता, इसलिए मेरे पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका गुस्सा किसी व्यक्ति के प्रति नहीं है और वे पार्टी के साथ बने रहेंगे।

पार्टी के प्रति निष्ठा बरकरार इस्तीफे के बावजूद, रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ रहे हैं। 53 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े रहने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि मुझे सिद्धरमैया, डीके शिवकुमार या पार्टी आलाकमान से कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है। वे विधायक के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे, लेकिन मंत्री पद से उनका इस्तीफा एक बड़ा संदेश दे गया है।

डैमेज कंट्रोल में जुटे डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्टी में सब कुछ सामान्य होने का दावा किया है। उन्होंने कहा, रामलिंगा रेड्डी मेरे बहुत अच्छे और करीबी दोस्त हैं। चिंता की कोई बात नहीं है, हम आपस में बैठकर बातचीत करेंगे और इस समस्या को जल्द सुलझा लेंगे।

सरकार पर सवाल यह घटनाक्रम कर्नाटक में कांग्रेस के सामने आने वाली आंतरिक चुनौतियों का संकेत है। हालांकि सीएम ने इसे सुलझाने का वादा किया है, लेकिन मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही जिस तरह से असंतोष के स्वर उठे हैं, उसने सरकार की स्थिरता और भविष्य की रणनीतियों पर बहस छेड़ दी है।

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