कॉकरोच के नाम से सियासी तूफान: क्या CJP युवाओं के गुस्से की नई आवाज़ या महज एक इंटरनेट ट्रेंड?
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भारत में राजनीति के गलियारों में एक नया और अनोखा नाम चर्चा का विषय बना हुआ है— कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर इसकी बढ़ती धमक ने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह महज एक क्षणिक ट्रेंड है या देश में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत?

एक टिप्पणी जिसने बदल दी तस्वीर

इस पार्टी का जन्म 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई के दौरान हुआ। खबरों के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले में टिप्पणी करते हुए बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहा था। हालांकि, बाद में स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के लिए थी, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर आक्रोश का ज्वालामुखी फट चुका था।

सोशल मीडिया से जनता तक का सफर

इस अभियान की शुरुआत बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत दीपके ने की। उन्होंने सादगी से पूछा, क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं? देखते ही देखते, पांच दिनों के भीतर इंस्टाग्राम पर 90 लाख फॉलोअर्स और एक्स (ट्विटर) पर लाखों समर्थकों के साथ CJP एक डिजिटल आंदोलन बन गई।

केजरीवाल कनेक्शन और विवाद

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का अतीत भी चर्चा में है। उनकी आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ पुरानी तस्वीरें और मनीष सिसोदिया के साथ जुड़ाव सामने आने के बाद कई सवाल उठे हैं। हालांकि, दीपके ने CJP को पूरी तरह स्वतंत्र बताते हुए किसी भी राजनीतिक दल से संबंध होने से इनकार किया है।

क्या जंतर-मंतर पर टिकेगा जोश?

CJP का असली इम्तिहान जमीन पर है। इतिहास गवाह है कि भारत में रायता भारत या अंजान आदमी पार्टी जैसे व्यंग्यात्मक नाम वाली कई पार्टियां बनीं, लेकिन वे चुनाव आयोग की फाइलों में सिमटकर रह गईं। CJP अब NEET पेपर लीक, CUET अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसमें सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का जुड़ना इसे एक नई गंभीरता दे रहा है।

कानूनी रूप से कहां खड़ी है CJP?

फिलहाल CJP एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत किसी भी पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए चुनाव आयोग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, जिसमें पार्टी के संविधान, शपथ पत्र और सिद्धांतों का विवरण देना होता है। अभी CJP अपने प्रदर्शनों के जरिए केवल दबाव समूह (Pressure Group) के तौर पर सक्रिय है।

क्या कॉकरोच जनता पार्टी वाकई व्यवस्था में सुधार लाएगी या सोशल मीडिया का यह शोर कुछ दिनों बाद शांत हो जाएगा? फिलहाल, 6 जून का जंतर-मंतर प्रदर्शन इस आंदोलन की दिशा और दशा तय करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।

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