कुवैत एयरपोर्ट पर कयामत का मंजर: ईरानी ड्रोन हमले में एक भारतीय की मौत, थर्राया खाड़ी क्षेत्र
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कुवैत सिटी: खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच 3 जून 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल 1 (T1) एक भीषण हमले का शिकार हो गया। ड्रोन हमले में टर्मिनल की इमारत पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है, जबकि कम से कम 63 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

सीसीटीवी में कैद तबाही का मंजर कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी सुरक्षा फुटेज में तबाही की रौंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक मिसाइल या ड्रोन टर्मिनल से टकराता है और एक जोरदार धमाके के साथ छत का बड़ा हिस्सा ढह जाता है। हर तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है।

हमलावर कौन? ईरान और कुवैत आमने-सामने कुवैत सरकार ने इसे ईरान की क्रूर आक्रामकता बताते हुए कड़ी निंदा की है। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि यह नुकसान अमेरिका निर्मित पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल में आई तकनीकी खराबी के चलते हुआ है। हालांकि, कुवैती सेना इन दावों को मनगढ़ंत बताकर उच्च स्तरीय जांच की बात कह रही है।

भारतीय दूतावास सक्रिय, घायलों को मदद का भरोसा इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि विदेश मंत्रालय ने की है। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि वे पीड़ित परिवार और घायलों के संपर्क में हैं। दूतावास हर संभव सहायता मुहैया कराने के लिए कुवैती प्रशासन के साथ लगातार समन्वय कर रहा है।

टूटने की कगार पर संघर्ष-विराम (Ceasefire) इस हमले ने 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए नाजुक संघर्ष-विराम को खतरे में डाल दिया है। यह हमला पिछले एक महीने से बनी शांति को भंग करने वाली सबसे गंभीर घटना मानी जा रही है। हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान के कारण फिलहाल वहां परिचालन पूरी तरह ठप है।

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती यह घटना दर्शाती है कि खाड़ी देश अब क्षेत्रीय युद्ध की आग से सुरक्षित नहीं रहे हैं। विदेशी सैन्य संपत्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के केंद्र होने के कारण कुवैत जैसे देश, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे छद्म युद्ध (Proxy War) के मुख्य केंद्र बनते जा रहे हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस तनाव के अगले कदम पर टिकी हैं।

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