लड़ेंगे या मरेंगे : ममता बनर्जी का बिगुल, पुलिस की ना के बावजूद कोलकाता में शुरू हुआ ऐतिहासिक धरना
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सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। विधानसभा चुनाव के बाद से जारी सियासी खींचतान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने सीधे सड़क का रुख किया है। कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित वाई-चैनल पर ममता ने कोलकाता पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद मोर्चा खोल दिया है।

गिरफ्तार करना है तो करो, झुकेंगे नहीं धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा, अगर बीजेपी को लगता है कि वे हमें डरा लेंगे, तो वे गलत हैं। अगर गिरफ्तार करना है तो कर लो, लेकिन मैं पीछे हटने वाली नहीं हूं। उन्होंने लड़ेंगे या मरेंगे का नारा देते हुए स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना उनका अधिकार है जिसे छीना नहीं जा सकता।

अभिषेक बनर्जी पर हमले से भड़कीं ममता अपने भतीजे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले को लेकर ममता काफी आक्रामक दिखीं। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने जरूरत पड़ने पर उनसे मदद मांगी थी, वे आज अभिषेक पर हुए हमले पर चुप्पी साधे हुए हैं। ममता ने साफ कहा कि यह हमला पार्टी को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।

दिल्ली तक ले जाएंगी लड़ाई ममता ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें बंगाल में लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अनुमति नहीं दी गई, तो वह अपनी इस लड़ाई को दिल्ली तक ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि वह विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाएंगी और केंद्र की नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आवाज बुलंद करेंगी।

हार के बाद पहली बड़ी चुनौती हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह पहला मौका है जब ममता बनर्जी ने इतना बड़ा सार्वजनिक आंदोलन शुरू किया है। पार्टी के भीतर विधायकों के निष्कासन और बढ़ती खींचतान के बीच यह धरना TMC के लिए अपनी साख बचाने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।

विवादों में घिरीं चुनावी प्रक्रिया ममता ने एक बार फिर चुनावी परिणामों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना के दौरान गड़बड़ी हुई और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उनके साथ हुए कथित अन्याय को लेकर उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।

सियासी तापमान चरम पर एक तरफ TMC इस धरने को लोकतंत्र की रक्षा और कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे हार से उबरने के लिए सहानुभूति पाने का नाटक करार दे रहा है। बिना पुलिस अनुमति के शुरू हुए इस धरने ने बंगाल में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि ममता का यह कदम राज्य की सियासत को किस ओर ले जाएगा।

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