बीते एक दशक में कांग्रेस कई राज्यों से अपनी सत्ता गंवा चुकी है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल विपक्षी दल नहीं, बल्कि घर की लड़ाई रही है। जब भी राज्यों में अंतर्कलह चरम पर होती है, दिल्ली दरबार में सुलह का दौर शुरू होता है और अंत में एक मुस्कुराती हुई फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाती है। कर्नाटक में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार की हालिया तस्वीर इसी ट्रेंड का नया हिस्सा है।
राजस्थान: यूनाइटेड कलर्स का दांव राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच का टकराव किसी से छिपा नहीं है। पायलट ने अपनी ही सरकार के खिलाफ तेवर दिखाए तो नौबत पार्टी छोड़ने तक पहुंच गई थी। राहुल गांधी ने दोनों के साथ फोटो शेयर कर The united colours of Rajasthan का नारा दिया, लेकिन धरातल पर यह खींचतान आज भी पार्टी के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
पंजाब: जब कैप्टन ने छोड़ दिया हाथ पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की लड़ाई ने कांग्रेस की पूरी बिसात बिगाड़ दी। हाईकमान ने सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की, लेकिन नतीजे उम्मीद के उलट रहे। अंततः कैप्टन ने पार्टी छोड़ दी और सत्ता की बागडोर कांग्रेस के हाथों से फिसल गई।
मध्य प्रदेश: फोटो ने नहीं बचाई सरकार मध्य प्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया। राहुल गांधी ने लियो टॉल्स्टॉय के कोट के साथ दोनों की फोटो पोस्ट कर धैर्य रखने की सलाह दी थी। हालांकि, यह धैर्य काम नहीं आया और 2020 में सिंधिया के पाला बदलने से कमलनाथ सरकार अल्पमत में आकर गिर गई।
छत्तीसगढ़ और हरियाणा: सुलह की मशक्कत छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टी.एस. सिंह देव के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद के फॉर्मूले की चर्चा होती रही। हाईकमान के हस्तक्षेप से सरकार तो बच गई, लेकिन पार्टी को निरंतर दबाव का सामना करना पड़ा। वहीं, हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा के बीच का कोल्ड वॉर भी लंबे समय तक पार्टी की चिंता का विषय रहा है।
कर्नाटक: क्या फिर वही कहानी दोहराई जाएगी? कर्नाटक में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चली लंबी रस्साकशी के बाद अब सुलह का दावा किया जा रहा है। खरगे और राहुल गांधी के साथ दोनों नेताओं की फोटो जारी कर संदेश दिया गया है कि अब सब एकजुट हैं। डी.के. शिवकुमार की तपस्या सफल हुई या यह महज एक अस्थायी समझौता है, यह देखना बाकी है।
साफ है, कांग्रेस के लिए ऐसी ट्रेडमार्क तस्वीरें अब एक रवायत बन चुकी हैं। ये तस्वीरें क्षणिक राहत तो देती हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि जब तक जमीनी स्तर पर नेतृत्व का संतुलन ठीक नहीं होता, ये तस्वीरें सिर्फ ऑल इज वेल का एक सियासी छलावा बनकर रह जाती हैं।
The united colours of Rajasthan! pic.twitter.com/D1mjKaaBsa
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 14, 2018
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