डिजिटल क्लासरूम या हिंसा की पाठशाला : क्या आपके बच्चे को गुमराह कर रहे हैं यूट्यूबर्स?
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आज के दौर में जब हर बच्चा ऑनलाइन कोचिंग के जरिए अपने सपनों की उड़ान भरना चाहता है, तब एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। क्या आप जानते हैं कि आपका बच्चा बंद कमरे में अपने डिजिटल गुरु से मैथ्स और साइंस पढ़ रहा है या फिर उसे विद्रोह और हिंसा का पाठ पढ़ाया जा रहा है?

शिक्षा के नाम पर एजेंडा का खेल एसएससी (SSC) और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कुछ यूट्यूबर्स अब शिक्षा से हटकर एक खतरनाक एजेंडे पर काम कर रहे हैं। ये शिक्षक क्लास में गणित के फार्मूले समझाने के बजाय मेनस्ट्रीम मीडिया, पत्रकारों और एंकर्स के खिलाफ नफरत का केमिकल बच्चों के दिमाग में भर रहे हैं।

छात्रों को बनाया जा रहा मोहरा यह केवल दो लोगों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि इसमें लाखों बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है। अभिनय शर्मा जैसे कई यूट्यूबर्स हैं, जो छात्रों को अपनी क्रांति का हथियार बना रहे हैं। माता-पिता लाखों रुपये फीस इसलिए देते हैं ताकि बच्चा पढ़-लिखकर सफल हो सके, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उनके बच्चों को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा है।

बिना जवाबदेही का अनकंट्रोल्ड सिस्टम मेनस्ट्रीम मीडिया कानूनी दायरे और जवाबदेही के साथ काम करता है। किसी भी खबर के गलत होने पर न्यूज चैनलों को जवाब देना पड़ता है। दूसरी ओर, ये यूट्यूबर्स बिना किसी रेगुलेशन के यूट्यूब से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं और अपनी वैचारिक रोटियां सेंकने के लिए मीडिया की विश्वसनीयता पर हमले कर रहे हैं। आखिर इनकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

कोचिंग का अरबों का कारोबार और हकीकत भारत में कोचिंग इंडस्ट्री का कारोबार 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें टेस्ट प्रिपरेशन सेक्टर का बड़ा हिस्सा है। लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि इन संस्थानों का सक्सेस रेट 10 प्रतिशत से भी कम है। ये यूट्यूबर्स अपनी मोटी कमाई (करोड़ों की संपत्ति) तो बना लेते हैं, लेकिन बच्चों को सही राह दिखाने में नाकाम रहते हैं।

जिम्मेदारी से भाग रहे क्रांतिकारी शिक्षक इन यूट्यूबर्स ने कभी कोटा में बच्चों की आत्महत्याओं या कोचिंग की लूट पर सवाल नहीं उठाए। ये छात्रों की असली समस्याओं पर खामोश रहते हैं, क्योंकि इनका मकसद शिक्षा देना नहीं, बल्कि अपनी वैचारिक पहचान को चमकाना है। यदि इन्हें राजनीति करनी है, तो इन्हें खुलकर मैदान में आना चाहिए, न कि बच्चों की पढ़ाई को अपनी राजनीति का जरिया बनाना चाहिए।

अभिभावकों के लिए चेतावनी अपील है कि यदि आपका बच्चा ऑनलाइन कोचिंग ले रहा है, तो पहले यह परखें कि उनका शिक्षक कौन है और उसका अतीत क्या है। सोशल मीडिया के इस दौर में हिंसा और अराजकता फैलाने वाले इन डिजिटल शिक्षकों को पहचानना जरूरी है। छात्रों को हथियार बनाना न केवल भविष्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह देश की आने वाली पीढ़ी के साथ एक बौद्धिक धोखा है।

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