तमिलनाडु की सियासत में भूचाल: क्या के. अन्नामलाई भाजपा छोड़कर बनाएंगे अपनी नई पार्टी?
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तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। राज्य भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे पार्टी से नाराज चल रहे हैं और जल्द ही अपना अलग राजनीतिक मंच तैयार कर सकते हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि अन्नामलाई 4 जून 2026 को अपने 42वें जन्मदिन के मौके पर अपनी नई पार्टी का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक न तो अन्नामलाई और न ही भाजपा नेतृत्व की ओर से इस पर कोई पुष्टि की गई है।

नाराजगी की वजह: दिल्ली का पलानीस्वामी प्रेम

अन्नामलाई की नाराजगी का मुख्य कारण हालिया चुनावों के बाद भाजपा की रणनीति को माना जा रहा है। अन्नामलाई चाहते थे कि भाजपा द्रविड़ पार्टियों की बैसाखी छोड़कर अकेले चुनाव लड़े। लेकिन भाजपा आलाकमान ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) नेता एडाप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) को ज्यादा तरजीह दी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अन्नामलाई को लगा कि पार्टी ने उनके द्वारा राज्य में खड़ी की गई मेहनत को नजरअंदाज कर उन्हें किनारे कर दिया, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

भाषा नीति पर भाजपा से अलग रुख

हाल ही में अन्नामलाई ने सीबीएसई (CBSE) की तीन-भाषा नीति पर सवाल उठाकर सबको चौंका दिया। अब तक भाजपा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इस फार्मूले का समर्थन करती आई है, लेकिन अन्नामलाई का इसे लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाना यह संकेत देता है कि वे अब तमिलनाडु की क्षेत्रीय भावनाओं के अनुरूप अपनी अलग राह तलाश रहे हैं।

जातीय समीकरण और वर्चस्व की लड़ाई

अन्नामलाई और पलानीस्वामी दोनों ही शक्तिशाली वेल्लार गौंडर समुदाय से आते हैं। पश्चिमी तमिलनाडु में इस समुदाय का दबदबा है। भाजपा नेतृत्व का पलानीस्वामी को प्राथमिकता देना अन्नामलाई के लिए अपने राजनीतिक कद को बचाने की चुनौती बन गया था। वे महसूस करते हैं कि पार्टी ने उन्हें एक स्वतंत्र और आक्रामक नेता के बजाय केवल एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया।

स्पिन-ऑफ गेम या भविष्य की रणनीति?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई का अलग होना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है। चूंकि तमिलनाडु में भाजपा की हिंदुत्ववादी विचारधारा को अभी तक व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिली है, इसलिए पार्टी उन्हें एक क्षेत्रीय चेहरे के रूप में आगे बढ़ा सकती है।

यदि अन्नामलाई की नई पार्टी मजबूत होती है और वे एम.के. स्टालिन की द्रमुक (DMK) या अभिनेता विजय की नई राजनीति के खिलाफ एक तमिल विकल्प बनकर उभरते हैं, तो भविष्य में भाजपा फिर उनके साथ गठबंधन कर सकती है।

अब सबकी निगाहें 4 जून 2026 पर टिकी हैं। क्या के. अन्नामलाई वाकई भाजपा के साथ अपना नाता तोड़ेंगे? यदि ऐसा होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति के भविष्य को हमेशा के लिए बदल सकता है।

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