साढ़े 10 बजे आवास पर आइए —नीतीश कुमार के बुलावे ने बढ़ाई बिहार की सियासी धड़कन
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बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अचानक बढ़ी सक्रियता और उनके करीबी नेताओं के साथ लगातार मुलाकातों ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच नीतीश का सहज अंदाज और फिर नेताओं को व्यक्तिगत रूप से मिलने का संदेश देना कई अटकलों का कारण बना हुआ है।

करीबी नेताओं के साथ बैठकों का दौर नीतीश कुमार पिछले दो दिनों से अपने सबसे भरोसेमंद नेताओं के साथ लगातार मंथन कर रहे हैं। पहले उन्होंने वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी को तलब किया और सरकार व संगठन की गतिविधियों का पूरा ब्यौरा मांगा। इसके अगले ही दिन उन्होंने जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा को भी अपने आवास पर मिलने के लिए बुलाया।

साढ़े 10 बजे आइए : रहस्यमयी निमंत्रण कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए संजय झा से कहा, सुबह 10 बजे नहीं, बल्कि साढ़े 10 बजे आवास पर आइए, आपसे बात करनी है। मुख्यमंत्री के इस छोटे से निर्देश ने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या यह किसी बड़े फैसले की आहट है, या महज एक सामान्य संगठनात्मक चर्चा?

चुनावी तैयारी या जमीनी फीडबैक? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच नीतीश कुमार संगठन को पूरी तरह दुरुस्त करना चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नीतीश सीधे अपने भरोसेमंद सहयोगियों के जरिए जमीनी हकीकत, सरकारी योजनाओं के असर और जनता के मूड का फीडबैक लेना चाहते हैं। वे सूचनाओं के लिए किसी अन्य माध्यम पर निर्भर रहने के बजाय खुद स्थिति को परख रहे हैं।

अप्रत्याशित फैसलों की राजनीति नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर हमेशा से चौंकाने वाले फैसलों के लिए जाना गया है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे संगठन को सशक्त बनाने की सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन बैठकों की टाइमिंग ने इसे रहस्यमय बना दिया है। फिलहाल, इन गुप्त मुलाकातों का वास्तविक एजेंडा क्या है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन बिहार की राजनीति का तापमान निश्चित रूप से बढ़ गया है।

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