प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच हुई हालिया बातचीत में भारत ने म्यांमार में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा और साइबर घोटालों पर कड़ा रुख अपनाया है। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है।
सुरक्षा का अभेद्य कवच विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया है कि एक-दूसरे की जमीन का इस्तेमाल किसी भी सूरत में एक-दूसरे की सुरक्षा के विरुद्ध नहीं किया जाएगा। म्यांमार ने भारत को आश्वस्त किया है कि वह भारत विरोधी गतिविधियों को अपनी सीमा के भीतर पनपने नहीं देगा। यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिहाज से एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
साइबर स्कैम का जाल और भारतीयों की वापसी बैठक का एक बड़ा हिस्सा म्यांमार में चल रहे साइबर स्कैम नेटवर्क और मानव तस्करी के मुद्दे पर केंद्रित था। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, अभी भी करीब 150 से ज्यादा भारतीय नागरिक म्यांमार के साइबर स्कैम केंद्रों में फंसे हुए हैं।
सरकार अब तक 2,411 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने में सफल रही है। विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि इन लोगों को अक्सर तीसरे देशों के रास्ते तस्करी कर म्यांमार लाया जाता है, इसलिए इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्षेत्रीय सहयोग अनिवार्य है। म्यांमार सरकार ने इन भारतीयों की सुरक्षित वापसी में पूर्ण सहयोग का वादा किया है।
व्यापार और तकनीकी साझेदारी पर जोर सुरक्षा के अलावा, दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने पर चर्चा की। वर्तमान में भारत और म्यांमार के बीच 2 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार है। इस यात्रा के दौरान टेक्नोलॉजी, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
राष्ट्रपति ह्लाइंग ने ग्रेटर नोएडा स्थित एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी सेंटर का भी दौरा किया, जो दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है। साथ ही, महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (rare earths) के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग की संभावनाओं पर मंथन किया गया है।
भविष्य की राह म्यांमार के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को म्यांमार आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया है। यह यात्रा न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि साइबर अपराध जैसे गंभीर खतरों से निपटने में भी एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि म्यांमार सरकार फंसे हुए भारतीयों को वापस लाने के वादे पर कितनी जल्दी अमल करती है।
*#WATCH | Delhi: Responding to ANI s question on whether any discussions on enhancing economic cooperation in critical minerals and rare earths were held between Myanmar President U Min Aung Hlaing and PM Modi, Foreign Secretary Vikram Misri says, Yes, issues related to critical… pic.twitter.com/ugrbinBNK8
— ANI (@ANI) June 1, 2026
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