ईरान का कुवैत पर बड़ा हमला: मिसाइल और ड्रोन की बौछार से दहला खाड़ी क्षेत्र
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कुवैत सिटी: खाड़ी देशों में तनाव का स्तर उस समय और बढ़ गया जब सोमवार को ईरान ने कुवैत पर अचानक बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया। इस हमले के बाद पूरे देश में सायरन बजने लगे और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

अमेरिकी सुरक्षा कवच सक्रिय हमले की सूचना मिलते ही कुवैती सेना और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने ईरान के दागे गए मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नाकाम करने के लिए रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी। खबर लिखे जाने तक किसी जान-माल के बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हमले के पीछे का कारण विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईरान की ओर से बदले की कार्रवाई है। दरअसल, शनिवार और रविवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने क्षेत्र में ईरानी सैन्य गतिविधियों के जवाब में जवाबी हमले किए थे। इसी जवाबी कार्रवाई से बौखलाकर ईरान के आईआरजीसी (IRGC) ने कुवैत को निशाना बनाया है, जहाँ अमेरिकी सेना के अहम सैन्य अड्डे मौजूद हैं।

ऊर्जा सुरक्षा पर संकट ईरान और कुवैत के बीच जारी इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। पूर्व के हमलों में कुवैत के कच्चे तेल उत्पादन पर असर पड़ा था। अगर यह तनाव इसी तरह बना रहा, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।

परमाणु कार्यक्रम बना असली जड़ अमेरिका और ईरान के बीच यह तनातनी का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को अपना 60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा। अमेरिका का तर्क है कि यदि ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया, तो यह दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएगा।

शांति वार्ता पर अनिश्चितता ईरान परमाणु कार्यक्रम जारी रखने पर अड़ा हुआ है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। हालांकि, हाल ही में पाकिस्तान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई थी, लेकिन ताजा हमलों ने उन वार्ताओं को भी अधर में लटका दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस हमले का जवाब किस तरह देता है।

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