क्या विदेशी धरती पर भारतीय पर्यटकों का सिविक सेंस हमारी छवि बिगाड़ रहा है?
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आज के दौर में घूमना-फिरना शौक बन चुका है, लेकिन विदेश में भारतीय पर्यटकों के व्यवहार को लेकर छिड़ी बहस ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में उद्योगपति हर्ष गोयनका ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।

स्विट्जरलैंड के होटल में खास नियम

गोयनका ने स्विट्जरलैंड के गस्टाड स्थित आर्क-एन-सिएल होटल का जिक्र करते हुए बताया कि वहां भारतीय मेहमानों के लिए विशेष निर्देश चस्पा किए गए थे। इनमें साफ लिखा था कि नाश्ते के बुफे से खाना बाहर न ले जाएं, गलियारों और बालकनी में शोर न मचाएं और केवल निर्धारित बर्तनों का ही उपयोग करें। होटल का स्पष्ट कहना था कि बुफे का खाना केवल नाश्ते के लिए है, लंच के लिए अलग से भुगतान करना होगा।

बढ़ता विवाद: गरबा से लेकर एयरपोर्ट तक

यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर भारतीयों के अजीबोगरीब व्यवहार के वीडियो वायरल हो रहे हैं। फिर चाहे वह रेस्टोरेंट में गरबा करना हो, एयरपोर्ट पर तेज आवाज में बातें करना हो या फ्लाइट के केबिन को पिकनिक स्पॉट में बदलना। गोयनका ने दावोस की एक घटना का भी जिक्र किया, जहां एक बिजनेसमैन ने तेज पंजाबी म्यूजिक बजाकर इसे सॉफ्ट पावर का नाम दिया था, जिससे वहां मौजूद अन्य लोग खासे परेशान हुए।

क्या भारत को जापान से सीखने की जरूरत है?

गोयनका ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि जापान अपनी विनम्रता और अनुशासन के दम पर दुनिया भर में सम्मानित है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को एक ग्लोबल सुपरपावर बनना है, तो हमें अपनी काबीलियत के साथ-साथ दूसरों के प्रति सम्मान और बेहतर सिविक सेंस भी दिखाना होगा।

सोशल मीडिया पर दो फाड़ हुई राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों का मानना है कि यह शर्मनाक है और हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। वहीं, कई यूजर्स का यह भी कहना है कि किसी एक व्यक्ति या समूह की गलती के आधार पर पूरे देश को बदनाम करना गलत है। कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि सिविक सेंस किसी देश की सीमा तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत संस्कार होना चाहिए।

सिर्फ विदेश ही नहीं, देश में भी जरूरी सुधार

हकीकत यह है कि यह समस्या सिर्फ विदेश तक सीमित नहीं है। भारत के कई पर्यटन स्थलों, जैसे उत्तराखंड की नदियों और सड़कों पर कचरा फैलाना, शराब की बोतलें फेंकना और सार्वजनिक स्थानों को गंदा करना आम बात हो गई है। यह स्पष्ट है कि जब तक हम अपने देश में नियमों का पालन करना नहीं सीखेंगे, विदेश में भी वही व्यवहार दोहराया जाएगा। क्या हम एक सभ्य पर्यटक बनने के लिए तैयार हैं? यह सवाल अब हर भारतीय को खुद से पूछना चाहिए।

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