नए CDS जनरल एनएस राजा सुब्रमणि का मिशन मोड : आधुनिकीकरण और थिएटराइजेशन पर रहेगा फोकस
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भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कार्यभार संभालते ही अपनी प्राथमिकताओं का खाका खींच दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत की संप्रभुता की रक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण उनकी कार्यशैली का केंद्र बिंदु होगा।

पूर्व दिग्गजों को नमन पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन में जनरल सुब्रमणि ने देश के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। साथ ही, उन्होंने जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल और उनके नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने पिछले करीब पौने चार वर्षों में सेनाओं के बीच समन्वय को नई दिशा दी।

नवाचार और सहयोग पर जोर नए सीडीएस ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सोच और क्रिया में नवाचार जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि सेना अब अकेले काम नहीं करेगी, बल्कि उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान निकायों के साथ व्यापक साझेदारी करेगी। इसी तालमेल को सेना के आधुनिकीकरण का प्रमुख आधार माना जा रहा है।

आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण जनरल सुब्रमणि ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का वादा किया। सेना को आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस करने के लिए स्वदेशीकरण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। स्वदेशी हथियारों के उपयोग से न केवल सेना अधिक सशक्त होगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति भी मजबूत होगी।

थिएटराइजेशन और सैन्य सुधार सेना के एकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना जनरल सुब्रमणि के सामने सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है। वे थिएटराइजेशन (Theatre Command Model) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे, जिससे थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और किसी भी युद्ध जैसी स्थिति में तीनों अंग एक इकाई के रूप में काम कर सकें।

जवानों का कल्याण सर्वोपरि तकनीकी और रणनीतिक बदलावों के बीच, उन्होंने जवानों के प्रशिक्षण और उनके कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। इसके अलावा, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के सम्मान व कल्याण के लिए भी उन्होंने प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि सशस्त्र बल पूरी व्यावसायिकता और साहस के साथ राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित रहेंगे।

जनरल अनिल चौहान की विरासत जनरल सुब्रमणि ने ऐसे समय में पदभार संभाला है जब भारतीय सेना बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। उनसे पहले जनरल अनिल चौहान ने थिएटराइजेशन और नागरिक-सैन्य एकीकरण की नींव को मजबूत किया था। अब जनरल सुब्रमणि को इसी प्रक्रिया को निर्णायक मुकाम तक ले जाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

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