विनेश फोगाट की हार और व्यवस्था से आर-पार की लड़ाई: क्या यह अंत है या नई शुरुआत?
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नई दिल्ली: पेरिस ओलंपिक के जख्मों को पीछे छोड़ भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने जब एशियन गेम्स ट्रायल के मैट पर कदम रखा, तो प्रशंसकों को एक परीकथा जैसी वापसी की उम्मीद थी। हालांकि, सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत से 4-6 की हार के साथ विनेश का यह सफर फिलहाल थम गया है। मैच के बाद विनेश का दर्द छलक उठा और उन्होंने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।

ट्रायल से पहले हाई-वोल्टेज ड्रामा मुकाबला शुरू होने से पहले ही खेल का माहौल गरमा गया। आधिकारिक वजन-माप के दौरान विनेश को बताया गया कि वह केवल 50 किलो वर्ग में ही खेल सकती हैं। विनेश ने इसे अपने साथ भेदभाव करार दिया और महासंघ (WFI) पर निशाना साधा। भारी विवाद के बाद WFI अध्यक्ष संजय सिंह के हस्तक्षेप से उन्हें 53 किलो वर्ग में खेलने की अनुमति मिली, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया।

सिस्टम के खिलाफ विनेश का तीखा हमला विनेश ने हार के बाद सीधे शब्दों में कहा, पूरा सिस्टम एक ओर था और मैं व मेरी टीम एक तरफ। सभी लोग मिले हुए हैं, यह एकतरफा लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें हार-जीत से समस्या नहीं है, लेकिन जब पूरा तंत्र ही एक खिलाड़ी के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो मुकाबला केवल मैट तक सीमित नहीं रहता।

मैट पर संघर्ष और तकनीकी खींचतान ट्रायल का सफर किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं था। निशु के खिलाफ मुकाबले में तकनीकी खराबी और गलत रेफरी कॉल के कारण विवाद पैदा हुआ। विनेश के पति और कोच सोमबीर राठी ने फॉल (पिन) की मांग की, लेकिन उन्हें उसका पूरा लाभ नहीं मिला। हालांकि, विनेश ने धैर्य दिखाते हुए वह मुकाबला तो जीत लिया, लेकिन सेमीफाइल तक आते-आते उनकी ऊर्जा बिखर गई और मीनाक्षी गोयत के खिलाफ वह लय नहीं मिल सकी।

मैं वापस आऊंगी : हार कर भी हारी नहीं विनेश भले ही एशियन गेम्स का रास्ता फिलहाल बंद हो गया हो, लेकिन विनेश ने हार नहीं मानी है। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा, मैं यहां कम से कम दो साल और रहूंगी। चेहरे पर मायूसी जरूर थी, लेकिन विनेश के तेवर यह बताने के लिए काफी हैं कि उन्होंने हार से सबक लिया है। यह विनेश के कुश्ती करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए और कड़े संघर्षपूर्ण अध्याय की शुरुआत है।

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