ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार भारतीय सेना, आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी ने दी बड़ी चेतावनी
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भारतीय सेना अब अगले बड़े सुरक्षा जोखिमों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पुणे में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की पासिंग आउट परेड के दौरान थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर भले ही अभी अस्थायी विराम पर है, लेकिन अगर भविष्य में ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की जरूरत पड़ती है, तो सशस्त्र बल इसके लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

युद्ध के बदलते स्वरूप पर सेना प्रमुख की चिंता जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज का युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। खतरे अब हाइब्रिड वॉरफेयर और ग्रे जोन जैसे नए रूपों में सामने आ रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि भविष्य के युद्धों में अंतरिक्ष, साइबर, मनोवैज्ञानिक और सूचना-आधारित युद्ध (Information Warfare) निर्णायक भूमिका निभाएंगे। आज का युद्धक्षेत्र अत्यधिक पारदर्शी हो गया है, जहां हर छोटी गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जाती है, इसलिए सुरक्षा और तैनाती के मामलों में अत्यधिक सावधानी अनिवार्य है।

जीत जमीन पर नहीं, दिमाग में होती है सेना प्रमुख ने सूचना युद्ध के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जीत हमेशा दिमाग में पहले जीती जाती है। उन्होंने कहा, सूचना युद्ध तभी सफल होता है जब पूरा देश एकजुट हो और अपने सुरक्षा तंत्र पर भरोसा करे। जिस राष्ट्र के लोग एक-दूसरे पर और अपने संस्थानों पर विश्वास करते हैं, वह युद्ध हमेशा जीतता है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सटीक सैन्य क्षमता और एकीकृत योजना बनाने की शक्ति को दुनिया के सामने साबित किया है।

सैनिकों के हाथ में ईगल और आधुनिकीकरण सेना के आधुनिकीकरण पर चर्चा करते हुए जनरल द्विवेदी ने ईगल ऑन द आर्म का विजन साझा किया। इसका अर्थ है कि सेना का हर जवान ड्रोन संचालित करने में सक्षम होना चाहिए। ड्रोन बटालियन, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिमान रेजिमेंट जैसे नए संरचनात्मक बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। सेना अब डेटा-केंद्रित (Data-centric) भविष्य की ओर बढ़ रही है, जहां फैसले अधिक तेज और सटीक होंगे।

थिएटराइजेशन रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय के पास लंबे समय से प्रतीक्षित सैन्य थिएटराइजेशन प्रक्रिया पर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। जनरल द्विवेदी ने जानकारी दी कि इस पर चर्चा पूरी हो चुकी है और अंतिम रिपोर्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप दी गई है। प्रस्तावित ढांचे में थल, जल और वायु सेनाओं के बीच सामंजस्य को नई प्राथमिकता दी गई है। इस नए मॉडल के तहत, तीनों सेनाओं के प्रमुख अपनी पारंपरिक बल गठन और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि थिएटर कमांडर सीधे परिचालन समन्वय का जिम्मा उठाएंगे।

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