CBSE टेंडर प्रक्रिया पर छात्र का बड़ा खुलासा: क्या किसी खास कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए बदले गए नियम?
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नई दिल्ली: सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक सनसनीखेज खुलासे में बोर्ड की टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सार्थक का दावा है कि टेंडर के नियमों में जानबूझकर ऐसी ढील दी गई, जिससे एक विशेष एडटेक कंपनी को अनुचित लाभ मिला।

15 बड़ी गड़बड़ियों का दावा

सार्थक ने अपने ब्लॉग में सीबीएसई के टेंडर दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया है। उन्होंने तुलनात्मक अध्ययन के जरिए करीब 15 विसंगतियों को उजागर किया है। मुख्य आरोप यह है कि पुराने टेंडर में जो सुरक्षा मानक मौजूद थे, उन्हें नए दस्तावेजों से हटा दिया गया।

इन बदलावों में प्रमुख रूप से खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को अयोग्य घोषित करने का क्लॉज हटाना, ब्लैकलिस्टिंग के नियमों में ढील देना और वित्तीय पात्रता की शर्तों को बदलना शामिल है।

तीन टेंडर और एक ही नतीजा

सार्थक के अनुसार, इस पूरे मामले में प्रक्रिया काफी संदिग्ध रही। सीबीएसई ने OSM के लिए तीन बार टेंडर जारी किए। पहला टेंडर पोर्टल से हटा दिया गया, दूसरे में सभी बोलीदाताओं को तकनीकी रूप से अयोग्य करार दिया गया और अंत में तीसरा टेंडर एक एडटेक कंपनी की झोली में डाल दिया गया।

सवाल यह उठता है कि क्या नियम केवल एक कंपनी को क्वालीफाई कराने के लिए बदले गए थे?

पारदर्शिता की मांग

यह खुलासा एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी के साथ काम करने के दौरान शुरू हुआ। सार्थक का मानना है कि सरकारी खरीद और टेंडर से जुड़ी प्रक्रियाएं सार्वजनिक होनी चाहिए ताकि जनता की गाढ़ी कमाई और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय हो सके।

उन्होंने कहा, OSM प्रणाली एक अच्छा कदम हो सकती है, लेकिन इसे बिना किसी व्यापक परीक्षण या पायलट प्रोजेक्ट के लागू करना गलत है।

अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर भी उठाए सवाल

सार्थक ने इस साल स्वयं सीबीएसई की परीक्षा दी है। उन्होंने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में उन्हें खुद भी कई समस्याएं महसूस हुईं। हालांकि, उनकी स्कैन की गई कॉपियां साफ थीं, लेकिन कई छात्रों को स्पष्टता न होने की समस्या झेलनी पड़ी।

सार्थक अब पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) प्रक्रिया के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे। उन्होंने सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें छात्रों को आगामी वर्षों से उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है, लेकिन साथ ही बोर्ड से अपने सवालों के स्पष्ट जवाब की मांग भी की है।

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