एसी विस्फोट ने ली पूर्व आईएएस धनेंद्र कुमार की जान: करनाल से वर्ल्ड बैंक तक का शानदार सफर
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दिल्ली के हौज खास इलाके में बुधवार रात एक दर्दनाक हादसे में 1968 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार का निधन हो गया। घर में लगे एसी (AC) में अचानक हुए जोरदार धमाके और उसके बाद फैली आग ने प्रशासनिक गलियारों के एक चमकते सितारे को हमसे छीन लिया।

क्या हुआ था उस रात? हौज खास स्थित घर में एसी की इनडोर यूनिट में अचानक ब्लास्ट हुआ, जिससे घर में आग लग गई। 80 वर्षीय धनेंद्र कुमार धुएं के गुबार में फंस गए, जिससे दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई। वहीं, उनका बेटा गंभीर रूप से घायल है। मौके पर मौजूद अन्य पांच लोग सुरक्षित बाहर निकल आए। पुलिस इसे शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ हादसा मान रही है।

जिलों से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर 1946 में जन्मे धनेंद्र कुमार का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। हरियाणा के करनाल और जींद में डिप्टी कमिश्नर के रूप में अपनी सेवा शुरू करने के बाद, उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लेबर कमिश्नर और डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज जैसे अहम पदों पर काम किया। केंद्र सरकार में वे रक्षा, सड़क परिवहन और संस्कृति मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सचिव रहे।

वर्ल्ड बैंक और CCI में निभाई बड़ी भूमिका धनेंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वर्ल्ड बैंक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे। इसके बाद, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के चेयरमैन के रूप में उन्होंने देश में प्रतिस्पर्धा कानूनों को नई दिशा दी और बड़ी कंपनियों के एकाधिकार पर अंकुश लगाने का सराहनीय कार्य किया।

हरियाणा के औद्योगिक विकास के सूत्रधार हरियाणा सरकार में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने राज्य में औद्योगिक पार्कों के विकास में अहम भूमिका निभाई। उनके इस विशेष योगदान के लिए उन्हें नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

रिटायरमेंट के बाद भी रहे बेहद सक्रिय सेवानिवृत्ति के बाद भी धनेंद्र कुमार शांत नहीं बैठे। वे कंपटीशन एडवाइजरी सर्विसेज इंडिया एलएलपी के संस्थापक चेयरमैन रहे और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के साथ बतौर चीफ मेंटर जुड़े रहे। लंदन में इंडियन इन्वेस्टमेंट सेंटर के रेजिडेंट डायरेक्टर के रूप में भी उन्होंने अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया था।

उनके आकस्मिक निधन से प्रशासनिक जगत में शोक की लहर है। एक ऐसा अधिकारी जिसने देश की नीतिगत नींव को मजबूत किया, उनकी विदाई बेहद दुखद और चौंकाने वाली है।

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