कांग्रेस के कट्टर विरोधी से कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक CM तक: सिद्दारमैया के राजनीतिक सफर का भावुक अंत
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कर्नाटक की राजनीति में दो दशक से अधिक समय तक जनता परिवार का हिस्सा रहे और कांग्रेस के मुखर आलोचक माने जाने वाले सिद्दारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। एक गरीब किसान परिवार से निकलकर राज्य के शीर्ष पद तक पहुंचने वाले सिद्दारमैया का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2006 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने न केवल अपनी जगह बनाई, बल्कि सात जनवरी 2026 को देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर कर्नाटक में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का नया इतिहास भी रचा।

कांग्रेस विरोधी से आलाकमान के भरोसेमंद तक 1980 के दशक की शुरुआत से 2005 तक सिद्दारमैया कांग्रेस के कट्टर विरोधी थे। एचडी देवेगौड़ा की जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) से निष्कासन के बाद, उन्होंने उस पार्टी का दामन थामा जिसे वह कभी सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। बीजेपी की विचारधारा से असहमत सिद्दारमैया ने कांग्रेस का हाथ थामा, जिसे उस समय राजनीतिक गलियारों में अकल्पनीय माना गया था। 2013 में पहली बार और 2023 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने अपनी राजनीतिक दृढ़ता साबित की।

अहिंदा के जरिए बनाई अपनी पहचान 2005 में जद(एस) से अलग होने के बाद सिद्दारमैया ने खुद को पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और दलितों के मसीहा के रूप में पेश किया। उन्होंने अहिंदा सम्मेलनों की अगुवाई की, जिसने उन्हें कर्नाटक के एक बड़े जननेता के रूप में स्थापित किया। कुरबा समाज से आने वाले सिद्दारमैया का प्रभाव इतना गहरा था कि वे नौ बार विधायक चुने गए और राज्य की राजनीति में एक निर्णायक ताकत बने रहे।

सत्ता का संघर्ष और विवादास्पद विदाई कर्नाटक में सत्ता साझा करने के फॉर्मूले के तहत सिद्दारमैया को अपना कार्यकाल पूरा होने से दो साल पहले ही पद छोड़ना पड़ा। उनके कार्यकाल के अंतिम समय में मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) में कथित अनियमितताओं के आरोप भी उनकी छवि के लिए चुनौती बने। इस इस्तीफे के साथ ही उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ उनका चला आ रहा सत्ता-संघर्ष भी अब थम गया है।

जनता मेरी ईश्वर है : भावुक हुए निवर्तमान CM इस्तीफे के बाद सिद्दारमैया ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, संविधान मेरा धर्म है और जनता मेरी ईश्वर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा केवल मुख्यमंत्री पद से है, सार्वजनिक जीवन से नहीं। उन्होंने जनता का आभार जताते हुए कहा कि वे अपनी अंतिम सांस तक सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। एक छोटे से गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचने वाले सिद्दारमैया ने अपनी विदाई को जनता के प्रति समर्पित किया।

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