ममता की पार्टी में विद्रोह की आग: दो बड़े नेताओं का तीखा हमला, TMC में मची खलबली
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की चिंगारी अब शोला बनती जा रही है। पार्टी के दो दिग्गज नेताओं—पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय—के बयानों ने नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शांतनु सेन का इस्तीफा: मैंने लड़ाई लड़ी, अब और नहीं डॉ. शांतनु सेन ने टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को भेजे पत्र में स्पष्ट कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई डॉक्टर की बलात्कार-हत्या की घटना और वहां फैले भ्रष्टाचार पर उन्होंने जो स्टैंड लिया था, वह पार्टी की लाइन से अलग था। उन्होंने लिखा, विभिन्न कठिन समय में मतभेद होने के बावजूद मैंने सार्वजनिक मंचों पर पार्टी के लिए लड़ाई लड़ी, लेकिन अब इसे बर्दाश्त करना मुश्किल है।

लोकतंत्र का अभाव: सुखेंदु शेखर ने खोली पोल दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी के आंतरिक कामकाज पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि टीएमसी में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है। रॉय ने आरोप लगाया कि पार्टी की बैठकें केवल दिखावा हैं, जहां कुछ चुनिंदा लोग अपनी बात थोपते हैं। उन्होंने कहा, मीटिंग का मतलब चर्चा होता है, लेकिन यहां न कोई चर्चा होती है और न ही किसी अन्य की राय सुनी जाती है।

आरजी कर मामला और पार्टी में दरार शांतनु सेन लंबे समय से आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर मुखर रहे हैं। इसी मुद्दे पर उन्होंने पार्टी के भीतर ही कड़ा विरोध झेला था। पहले उन्हें निलंबित भी किया गया था और प्रवक्ता पद से हटाया गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया था। अब पद से इस्तीफा देकर सेन ने यह जता दिया है कि पार्टी के साथ उनके वैचारिक मतभेद खत्म नहीं हुए हैं।

नेतृत्व के लिए बढ़ती चुनौतियां यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस कई आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व की कार्यशैली और एकतरफा फैसलों को लेकर नाराजगी का स्वर तेज होता जा रहा है। हालांकि, शांतनु सेन ने फिलहाल पार्टी छोड़ने से इनकार किया है, लेकिन उनके इस्तीफे ने यह तो साफ कर दिया है कि ममता बनर्जी की पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है।

क्या यह केवल कुछ नेताओं का असंतोष है या आने वाले समय में टीएमसी में किसी बड़े धमाके की आहट? यह देखना दिलचस्प होगा।

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