# सिद्दारमैया के पैर छूकर क्या ‘अहिंदा’ खजाने की चाबी तलाश रहे डीके शिवकुमार?
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कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार सुबह हुई ब्रेकफास्ट मीटिंग ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की केमिस्ट्री ने अटकलों को हवा दी है। इस दौरान डीके शिवकुमार का सिद्दारमैया के पैर छूने वाला दृश्य केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि कांग्रेस की गहरी आंतरिक राजनीति का एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

सत्ता का संतुलन और अहिंदा का गणित

कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य के पारंपरिक अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) वोट बैंक को बचाए रखना है। 2023 की प्रचंड जीत का आधार यही सामाजिक समीकरण था। सिद्दारमैया इस वर्ग के निर्विवाद नेता हैं। पार्टी जानती है कि उन्हें हटाना बिना किसी बड़े नुकसान के संभव नहीं है।

अहिंदा राजनीति का सिद्दारमैया कनेक्शन

सिद्दारमैया ने खुद को अहिंदा आंदोलन के मसीहा के रूप में स्थापित किया है। जेडी(एस) से अलग होने के बाद उन्होंने इस वर्ग को कांग्रेस के पाले में लाकर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने महादेवप्पा और सतीश जारकीहोली जैसे नेताओं को आगे बढ़ाकर ओबीसी नेतृत्व को नया आधार दिया, जिससे वोक्कालिगा-लिंगायत वर्चस्व वाली राजनीति में संतुलन बना।

2023 की जीत: सिर्फ एक चेहरा या सामूहिक प्रयास?

2023 में कांग्रेस की 135 सीटों की जीत के पीछे अहिंदा समीकरण के साथ-साथ डीके शिवकुमार की संगठनात्मक रणनीति और गारंटी योजनाओं का बड़ा हाथ था। हालांकि, विश्लेषक मानते हैं कि सिद्दारमैया का चेहरा इस जीत का मुख्य स्तंभ था। यही कारण है कि डीके शिवकुमार की नजरें अब उसी जनाधार पर टिकी हैं जिसे सिद्दारमैया ने वर्षों में सींचा है।

भविष्य की चुनौती: क्या बिखर जाएगा वोट बैंक?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्दारमैया के हटने की स्थिति में कांग्रेस के लिए अहिंदा वोटरों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी। यदि सिद्दारमैया को दरकिनार किया गया, तो गैर-प्रभावशाली ओबीसी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर पलायन कर सकता है।

पार्टी के सामने असली परीक्षा 2028 के चुनाव हैं। यदि सिद्दारमैया की भूमिका को पार्टी में सम्मानजनक तरीके से नहीं रखा गया, तो कांग्रेस अपना सबसे बड़ा सामाजिक हथियार खो सकती है। डीके शिवकुमार का झुककर आशीर्वाद लेना, संभवतः इसी बड़े राजनीतिक जोखिम को भांपने की एक कोशिश है।

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