चीन में हॉटपॉट पार्टी बनाम भारत में पेपर लीक : परीक्षा व्यवस्था में आखिर इतना बड़ा अंतर क्यों?
News Image

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें चीन के एक हाईस्कूल टीचर अपनी क्लास के छात्रों को परीक्षा से पहले हॉटपॉट पार्टी देते नजर आ रहे हैं। दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली गाओकाओ (Gaokao) परीक्षा से 10 दिन पहले टीचर का यह अंदाज बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए है। वहीं दूसरी ओर, भारत में नीट (NEET) जैसे बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक और प्रशासनिक गड़बड़ियों से लाखों छात्र मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

क्या है चीन की गाओकाओ और क्यों है इतनी अहम? चीन में गाओकाओ को केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाला भाग्य विधाता माना जाता है। यह नेशनल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम है। चीन में यह माना जाता है कि इसी परीक्षा का स्कोर तय करता है कि छात्र एक सफल करियर पाएगा या नहीं। यह अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटने का एकमात्र जरिया है, इसलिए इसे फेट-डिसाइडिंग एग्जाम कहा जाता है।

दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती गाओकाओ का स्तर बेहद कठिन और भव्य है। हर साल लगभग 1.2 से 1.3 करोड़ छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं। हालांकि इसका पासिंग रेट कागजों पर 80% दिखता है, लेकिन असली संघर्ष टॉप-टियर यूनिवर्सिटी (जैसे सिंघुआ और पेकिंग) में दाखिले के लिए है, जहाँ सिलेक्शन रेट 1% से भी कम है।

पेपर लीक बनाम अभेद्य सुरक्षा भारत और चीन की व्यवस्था में सबसे बड़ा अंतर सिस्टम की शुचिता है। भारत में जहां नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं पेपर लीक के कारण सवालों के घेरे में हैं, वहीं चीन में गाओकाओ के दौरान परीक्षा केंद्रों के पास नो-फ्लाई ज़ोन घोषित किए जाते हैं।

वहां निर्माण कार्यों पर रोक, हॉर्न बजाने पर प्रतिबंध और ड्रोन से कड़ी निगरानी रखी जाती है। चीन के कानून में नकल या पेपर लीक को गंभीर क्रिमिनल ऑफेंस माना जाता है, जिसके तहत 7 साल तक की जेल का प्रावधान है। वहां ऐसी धांधली की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

मेंटल हेल्थ: रैंकिंग से परे मानवीय दृष्टिकोण भारत में कोचिंग संस्कृति और भारी प्रतिस्पर्धा के कारण छात्र अक्सर अवसाद (Depression) का शिकार हो जाते हैं, जहाँ उन्हें केवल एक रैंक की तरह देखा जाता है। इसके विपरीत, चीन के उस वायरल वीडियो ने दिखाया कि कैसे वहां के शिक्षक परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए छात्रों के साथ खड़े होते हैं।

हॉटपॉट पर सूप परोसते उस टीचर ने सिर्फ खाना नहीं परोसा, बल्कि छात्रों को यह भरोसा दिलाया कि इस कठिन सफर में उनका गुरु उनके साथ है। परीक्षा में सख्त अनुशासन और छात्रों के प्रति ऐसी सहृदयता का तालमेल ही चीनी एग्जाम सिस्टम को दुनिया में अलग खड़ा करता है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

पीएम मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा तय: कूटनीतिक संबंधों में नया अध्याय

Story 1

यह बहुत घटिया सवाल है : प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना आपा खो बैठे ग्लेन फिलिप्स, पत्रकार को सुनाई खरी-खोटी

Story 1

वैभव सूर्यवंशी ने जीता सुनील गावस्कर का दिल, मैच से पहले किए गए इस काम ने लूटी महफिल

Story 1

पंडवानी की रानी तीजन बाई की तबीयत बिगड़ी, एम्स के ICU में चल रहा इलाज

Story 1

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलटफेर: सिद्धारमैया ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

Story 1

रंगे हाथों पकड़ी बेवफा पत्नी: पति ने धोया मांग का सिंदूर, प्रेमी से भरवाया नया सिंदूर

Story 1

राशन वितरण में बड़ा बदलाव: 80 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधा लाभ, सरकार ने बदले नियम

Story 1

यूनिवर्स बॉस की दहशत बनाम बेबी बॉस का खौफ: वैभव की 97 रनों की आतिशबाजी और क्रिस गेल का रिकॉर्ड

Story 1

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने मचाई खलबली, 3 शब्दों में शुभमन गिल को दी सीधी चुनौती

Story 1

BJP का बड़ा सियासी धमाका: 4 राज्यों में नए अध्यक्षों का ऐलान, चौंकाने वाले नामों पर लगी मुहर