तीन फीट लंबी पूंछ और गजब का रंग: छत्तीसगढ़ के जंगलों में दिखी दुर्लभ विशाल मालाबार गिलहरी
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छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र स्थित देवपुर के जंगल ने फिर एक बार अपनी समृद्ध जैव विविधता का लोहा मनवाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर जंगल में हाल ही में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान एक दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (Giant Malabar Squirrel) देखी गई है। इस दुर्लभ जीव की उपस्थिति ने वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

कैंप के दौरान हुआ दुर्लभ दर्शन वन विभाग द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक आयोजित समर कैंप के पहले दिन, 16 मई को बर्डिंग ट्रेल के दौरान यह जीव नजर आया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी हेमंत वर्मा ने की। कैंप में मौजूद प्रतिभागियों के लिए यह अद्भुत अनुभव था, जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

क्या है इस गिलहरी की खासियत? इसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका (Ratufa indica) है। यह भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबाई है, जो पूंछ सहित तीन फीट तक हो सकती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का एक आकर्षक मिश्रण होता है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है। यह गिलहरी एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर लंबी छलांग लगाने में माहिर है।

पारिस्थितिकी तंत्र का मजबूत संकेत वन विशेषज्ञों के अनुसार, विशाल भारतीय गिलहरी का किसी क्षेत्र में पाया जाना वहां के स्वस्थ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर का कहना है कि यह बारनवापारा अभ्यारण्य के जंगलों के सुरक्षित और समृद्ध होने का सीधा संकेत है।

कानूनी संरक्षण और सरकारी प्रयास यह गिलहरी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-2 के तहत एक संरक्षित प्रजाति है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। राज्य सरकार का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों के कारण ही दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने भी इस उपलब्धि को प्रदेश की जैव विविधता के लिए बेहद उत्साहजनक बताया है।

नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जागरूकता देवपुर समर कैंप में शामिल युवाओं और बच्चों के लिए यह अनुभव शिक्षाप्रद रहा। वन अधिकारियों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है और भविष्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में वे जागरूक नागरिक बनकर उभरते हैं।

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