ताजमहल के सामने फोटो खिंचवाना मार्को रूबियो को पड़ा भारी, ईरान ने इतिहास का दिया कड़वा हवाला
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की आगरा यात्रा और ताजमहल के सामने ली गई एक तस्वीर अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। रूबियो ने अपनी पत्नी के साथ मोहब्बत की इस निशानी के आगे तस्वीर क्या खिंचवाई, ईरान ने उन पर और उनकी नीतियों पर सोशल मीडिया के जरिए कड़ा तंज कस दिया है।

ईरान का तीखा हमला: इतिहास पता होता तो शर्म आती

हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूबियो की तस्वीर साझा करते हुए एक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, अगर रूबियो को इतिहास या वास्तुकला की समझ होती, तो वे यहां तस्वीर खिंचवाने के लिए खड़े नहीं होते।

ईरान का तर्क है कि ताजमहल एक मुगल सम्राट ने अपनी ईरानी मूल की पत्नी के लिए बनवाया था और इसे ईरानी वास्तुकारों की प्रतिभा ने आकार दिया था। दूतावास ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि आज रूबियो की सरकार उसी ईरानी सभ्यता को मिटाने की धमकी देती है, जिसकी कला और संस्कृति ने इस विश्व धरोहर को खड़ा किया।

ताजमहल और ईरानी कनेक्शन का सच

ताजमहल का निर्माण 1630 के दशक में शुरू हुआ और करीब 20 वर्षों तक चला। इतिहासकार बताते हैं कि उस दौर में भारत, मध्य एशिया और फारस (ईरान) की कला एक-दूसरे में घुली हुई थी। ताजमहल के गुंबद, ज्यामितीय डिजाइन और नक्काशी में इस्लामिक-फारसी शैली का स्पष्ट प्रभाव दिखता है।

हालांकि, यह कहना कि इसे केवल ईरानियों ने बनाया, ऐतिहासिक दृष्टि से अधूरा है। यह मुगलकालीन भारत की उस मिली-जुली संस्कृति का परिणाम है, जिसमें फारसी, तुर्की और भारतीय कारीगरों का साझा योगदान था। उस्ताद अहमद लाहौरी जैसे वास्तुकारों के नाम भारतीय वास्तुकला के उसी समृद्ध दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ईरान के तंज के पीछे छिपी राजनीति

ईरान के इस हमले के दो मुख्य पहलू हैं:

  1. सांस्कृतिक विरासत का दावा: ईरान यह याद दिलाना चाहता है कि फारसी सभ्यता का प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व की महान कलाकृतियों में रचा-बसा है।
  2. आज की राजनीति पर वार: इस टिप्पणी का छिपा हुआ मकसद आज की अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना करना है। ईरान यह जताना चाहता है कि जिस संस्कृति का रूबियो आज अपमान कर रहे हैं, उसी ने प्रेम की इस सबसे सुंदर इमारत को आकार दिया था।

सोशल मीडिया पर छिड़ा इतिहास का संग्राम

इस विवाद पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। ईरान की टिप्पणी के बाद भारतीय यूजर्स के बीच भी मतभेद देखने को मिले। जहां कुछ लोगों ने कहा कि ताजमहल पूरी तरह से भारत की विरासत है और इसे किसी देश विशेष से जोड़ना गलत है, वहीं कुछ का तर्क है कि इतिहास साझा होता है और इसे सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

कुल मिलाकर, एक पर्यटक की सामान्य तस्वीर ने अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों के पुराने घावों और सांस्कृतिक स्वाभिमान की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

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