ट्विशा शर्मा डेथ केस: रिटायर्ड जज सास पर गिर सकती है गाज? 27 मई को हाईकोर्ट तय करेगा बेल का भविष्य
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भोपाल की पूर्व मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 12 मई 2026 को कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद से ही यह केस देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें 27 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां ट्विशा की सास और रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने पर फैसला आ सकता है।

क्या है ट्विशा शर्मा के परिवार के गंभीर आरोप?

नोएडा की रहने वाली ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। महज पांच महीने के भीतर ही ट्विशा की मौत हो गई, जबकि वह दो महीने की गर्भवती थीं। मृतका के परिजनों का आरोप है कि उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर निशान और चोटें मिलने के बाद परिवार ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या बताया है और निष्पक्ष जांच के लिए दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की मांग की है।

क्यों सरकार और परिवार पहुंच गए हाईकोर्ट?

गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन अब मध्य प्रदेश सरकार और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने इसे चुनौती दी है। सरकार का तर्क है कि एक रिटायर्ड जज होने के नाते गिरिबाला सिंह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती हैं। याचिका में कहा गया है कि आरोपी ने क्राइम सीन को प्रभावित करने की कोशिश की, जिससे निष्पक्ष जांच बाधित हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा दखल: अब CBI करेगी जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि CBI ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है और टीम भोपाल पहुंच चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी ट्रायल बाय मीडिया से बचने की सख्त चेतावनी दी है।

27 मई की सुनवाई क्यों है इतनी अहम?

  1. बेल पर तलवार: अगर हाईकोर्ट गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करता है, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है।
  2. CBI जांच का रास्ता: बेल रद्द होने से CBI को पूछताछ और जांच में ज्यादा सहूलियत मिलेगी।
  3. न्यायपालिका की साख: क्योंकि आरोपी रिटायर्ड जज रही हैं, इसलिए इस केस का निष्पक्ष परिणाम न्याय व्यवस्था पर आम जनता के भरोसे के लिए अनिवार्य है।

कानूनी पेच

फिलहाल यह मामला IPC की धारा 498A (दहेज उत्पीड़न), 304B (दहेज मौत) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दर्ज है। 27 मई को दोपहर 2:30 बजे होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या आरोपी पक्ष को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका मिलता है या कोर्ट कड़ा रुख अपनाते हुए राहत वापस ले लेती है।

ट्विशा का परिवार अब केवल इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठा है। क्या CBI की जांच और हाईकोर्ट का फैसला उन्हें न्याय दिला पाएगा? इस सवाल का जवाब अब 27 मई की शाम तक स्पष्ट होने की संभावना है।

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