भारत-अमेरिका रिश्तों का नया अध्याय: विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने खोले सहयोग के नए दरवाजे
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल ही में एक विशेष बातचीत में भारत के साथ भविष्य के संबंधों और वैश्विक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के बेहतरीन व्यक्तिगत संबंध दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

डिफेंस और टेक्नोलॉजी पर फोकस रूबियो ने कहा कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों के दायरे को और अधिक विस्तारित करने के लिए है। उनका लक्ष्य डिफेंस को-प्रोडक्शन, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और निवेश के क्षेत्रों में एक साथ काम करना है। उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में पहले ही 20 बिलियन डॉलर का निवेश कर रखा है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

क्वाड की बढ़ती प्रासंगिकता क्वाड को लेकर उठ रहे सवालों पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ किया कि यह गठबंधन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि चार शक्तिशाली आर्थिक शक्तियों के रूप में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। रूबियो के अनुसार, रेयर अर्थ मिनरल्स जैसी सप्लाई चेन समस्याओं से निपटने में क्वाड की भूमिका अहम है।

ऊर्जा नीति और भारत की समझदारी भारत की ऊर्जा जरूरतों पर बात करते हुए रूबियो ने भारत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अपनी निर्भरता को विभिन्न देशों में बांटकर बहुत बुद्धिमानी का परिचय दे रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास ऊर्जा का पर्याप्त भंडार है और भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है।

ईरान पर सख्त रुख ईरान के मुद्दे पर रूबियो ने कड़ा लहजा अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता और होर्मुज जलडमरूमध्य में उनकी गतिविधियां अवैध हैं। हालांकि उन्होंने किसी सैन्य हमले के टाइमफ्रेम पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यूरेनियम संवर्धन और ईरान के आक्रामक व्यवहार का समाधान ढूंढना ही होगा।

ग्रीन कार्ड और इमिग्रेशन रिफॉर्म भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड की दिक्कतों पर रूबियो ने स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार कर रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय में सिस्टम में कई खामियां आ गई थीं। रूबियो ने भरोसा दिलाया कि ये सुधार थोड़े कठिन हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में यह सिस्टम अधिक स्थिर और सभी के लिए बेहतर साबित होगा।

आगे की राह अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच कई नई घोषणाएं देखने को मिलेंगी। उन्होंने पीएम मोदी को जल्द ही व्हाइट हाउस और दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में देखने की इच्छा भी जाहिर की।

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