पिता का निधन, आंखों में आंसू और मैदान पर 140 रनों का महाशतक : वो दिन जब सचिन बने सच्चे क्रिकेट के भगवान
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क्रिकेट की दुनिया में रिकॉर्ड्स तो रोज बनते और टूटते हैं, लेकिन कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो खेल के मैदान से ऊपर उठकर इंसानी जज्बे और फर्ज की मिसाल बन जाती हैं। 23 मई 1999 की तारीख क्रिकेट इतिहास में अदम्य साहस और भावुकता के एक ऐसे ही अध्याय के रूप में दर्ज है, जब एक बेटे ने अपने पिता के अंतिम संस्कार के महज तीन दिन बाद मैदान पर उतरकर इतिहास रच दिया था।

जब दुखों का टूटा पहाड़ 1999 इंग्लैंड वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम दबाव में थी। इसी बीच सचिन तेंदुलकर को एक ऐसी खबर मिली जिसने उनकी दुनिया हिला दी। मुंबई में उनके पिता और मार्गदर्शक प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सचिन टूर्नामेंट को बीच में छोड़कर भारत लौटे ताकि अपने पिता को अंतिम विदाई दे सकें। उनकी अनुपस्थिति में भारत जिम्बाब्वे से मुकाबला हार गया और टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर खड़ा था।

मां के शब्द बने प्रेरणा पिता को खोने के गम में डूबे सचिन के लिए वापसी करना बेहद कठिन था। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में उनकी मां रजनी तेंदुलकर ने एक मिसाल पेश की। उन्होंने सचिन से कहा, तुम्हारे पिता हमेशा तुम्हें देश के लिए खेलते देखना चाहते थे। घर पर बैठने से उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी, वापस जाओ और देश के लिए खेलो। मां के इन शब्दों ने सचिन को मानसिक रूप से फिर से खड़ा कर दिया।

ब्रिस्टल में रचा गया इतिहास पिता के अंतिम संस्कार के तीन दिन बाद, 23 मई को सचिन ब्रिस्टल के मैदान पर केन्या के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरे। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या कोई खिलाड़ी इतने बड़े व्यक्तिगत दुख से उबर सकता है? सचिन ने आलोचकों को अपने बल्ले से जवाब दिया। उन्होंने मात्र 101 गेंदों में 16 चौकों और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 140 रनों की चमत्कारी पारी खेल केन्याई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं।

आसमान की ओर देख पिता को दी श्रद्धांजलि जब सचिन ने अपना शतक पूरा किया, तो उनके चेहरे पर कोई सामान्य खुशी नहीं थी। उन्होंने नम आंखों से अपना बल्ला आसमान की तरफ उठाया। यह तस्वीर क्रिकेट इतिहास की सबसे भावनात्मक पलों में से एक बन गई। उस दिन के बाद से, अपने पूरे करियर में जब भी सचिन ने शतक लगाया, वे हमेशा आसमान की ओर देखकर अपने पिता का आशीर्वाद लेना कभी नहीं भूले।

क्यों कहलाए क्रिकेट के भगवान ? यह पारी केवल रनों का अंबार नहीं थी, बल्कि यह साबित करती थी कि एक लीजेंड बनने के लिए प्रतिभा के साथ चट्टान जैसा मानसिक जज्बा और देश के प्रति अटूट निष्ठा होनी जरूरी है। अपने 24 साल के लंबे करियर में 100 शतकों और 34,357 रनों का रिकॉर्ड बनाने वाले सचिन तेंदुलकर ने दिखा दिया कि क्यों उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। उन्होंने न केवल खेल खेला, बल्कि एक ऐसी विरासत छोड़ी जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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