अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड का चौंकाने वाला इस्तीफा, पति की बीमारी बनी वजह
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वाशिंगटन: अमेरिकी प्रशासन में एक बड़ा फेरबदल हुआ है। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई एक बैठक के दौरान उन्होंने अपने इस फैसले की जानकारी दी।

पति की बीमारी बनी इस्तीफे की वजह गबार्ड ने अपने इस्तीफे का मुख्य कारण अपने पति अब्राहम की सेहत को बताया है। उन्होंने एक भावुक पत्र में लिखा कि उनके पति को हड्डियों के कैंसर के एक अति दुर्लभ प्रकार का पता चला है।

गबार्ड ने कहा, इस कठिन घड़ी में, मुझे सार्वजनिक सेवा से हटकर अपने पति के साथ रहना होगा। मैं अंतरात्मा की आवाज के साथ उन्हें इस बीमारी से अकेले लड़ने के लिए नहीं छोड़ सकती। उन्होंने अपने पति को अपने 11 साल के वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा सहारा बताया।

क्या इस्तीफे के पीछे कोई और कारण है? जहां गबार्ड ने पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया है, वहीं चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामले से परिचित एक सूत्र ने दावा किया है कि व्हाइट हाउस ने गबार्ड को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।

गबार्ड ने अपने पत्र में राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले डेढ़ साल से ओडीएनआई (ODNI) का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उनका इस्तीफा 30 जून, 2026 से प्रभावी होगा।

कौन हैं तुलसी गबार्ड? तुलसी गबार्ड का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। 1981 में जन्मीं गबार्ड हवाई में पली-बढ़ीं। उनकी मां के हिंदू धर्म अपनाने के कारण उनका नाम भी हिंदू रखा गया, और वह खुद को गर्व से हिंदू बताती हैं। हालांकि, वह भारतीय मूल की नहीं हैं।

राजनीति में आने से पहले वे दो दशकों से अधिक समय तक आर्मी नेशनल गार्ड का हिस्सा रहीं और इराक व कुवैत में तैनात रहीं। 2013 से 2021 तक वे हवाई से सांसद रहीं और अमेरिकी संसद में पहुंचने वाली पहली हिंदू सदस्य बनीं।

अपने करियर के दौरान गबार्ड ने स्वास्थ्य सेवा, मुफ्त कॉलेज शिक्षा और गन कंट्रोल जैसे उदारवादी मुद्दों का समर्थन किया। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक दावेदार रहने के बाद, बाद में वह ट्रंप प्रशासन में शामिल हो गई थीं।

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