स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट: चीन-पाकिस्तान की अब खैर नहीं, अमित शाह का डिजिटल सुरक्षा कवच तैयार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए एक व्यापक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट का ऐलान किया है। नई दिल्ली में बीएसएफ के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले एक साल के भीतर भारतीय सीमाएं आधुनिक तकनीक से लैस होकर एक डिजिटल सुरक्षा कवच में तब्दील हो जाएंगी।

क्या है स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट? सरकार का यह मास्टरप्लान सीमाओं पर पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण है। अब सीमा की रक्षा केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक भी हर पल सजग रहेगी। इस सिस्टम को एक डिजिटल सुरक्षा कवच माना जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट के तहत ड्रोन, हाई-टेक रडार, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर को एक एकीकृत नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम दिन-रात और खराब मौसम में भी सीमा पर होने वाली हर संदिग्ध गतिविधि की सटीक जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक तुरंत पहुंचाएगा।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमाएं हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही हैं। यहां घुसपैठ, अवैध तस्करी और ड्रोन के जरिए हथियारों की आपूर्ति जैसी घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी रहती हैं।

गृह मंत्री ने इसे केवल घुसपैठ रोकने तक सीमित न मानकर देश की व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़ा है। सरकार का उद्देश्य नकली नोटों के नेटवर्क और तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाना है। इसके लिए सरकार पहले से मौजूद CIBMS (कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम) को अपग्रेड कर रही है।

AI बनेगा सबसे बड़ा हथियार इस स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की असली ताकत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) होगी। यह सिस्टम डेटा का तुरंत विश्लेषण करेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि सीमा पर कोई जानवर आता है, तो सिस्टम उसे सामान्य गतिविधि मानकर नजरअंदाज कर देगा।

हालांकि, यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति या हथियारों से लैस ड्रोन सीमा के करीब आता है, तो AI तुरंत खतरे की पहचान कर सुरक्षा बलों को अलर्ट भेज देगा। इससे जवान वास्तविक खतरों पर त्वरित कार्रवाई (Real-time action) कर सकेंगे।

डेमोग्राफी मिशन भी होगा अहम सुरक्षा ग्रिड के साथ-साथ केंद्र सरकार एक विशेष डेमोग्राफी मिशन पर भी काम कर रही है। इसका मुख्य लक्ष्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर निकालना है। साथ ही, इसका उद्देश्य संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों की जनसांख्यिकीय संरचना (Demographic structure) को सुरक्षित रखना है।

बीएसएफ के 60वें स्थापना वर्ष तक पूरी तरह से लागू होने वाला यह प्रोजेक्ट, भारत की सुरक्षा रणनीति में एक निर्णायक बदलाव लाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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