हरिद्वार: गंगा में चिकन बिरयानी बहाते हुए पकड़े गए युवक, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप
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उत्तराखंड के हरिद्वार से एक विचलित करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें दो युवक पवित्र गंगा नदी में चिकन बिरयानी से भरा ड्रम खाली करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है और लोगों में भारी आक्रोश है।

घटना का विवरण घटना हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र की बताई जा रही है। वीडियो में दिख रहा है कि दो लोग एक ड्रम में भरकर बिरयानी लाए और उसे सीधे गंगा में उड़ेल दिया। स्थानीय लोगों ने जब उन्हें इस हरकत के लिए टोका, तो एक आरोपी बाइक लेकर मौके से फरार हो गया, जबकि दूसरे को लोगों ने पकड़ लिया। पकड़े गए युवक से लोग लगातार सवाल कर रहे थे कि उसने गंगा को प्रदूषित क्यों किया।

साधु-संतों और श्रद्धालुओं में भारी रोष इस घटना ने धार्मिक भावनाओं को गहरा आहत किया है। हरिद्वार, जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और जहां चार धाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने आते हैं, वहां हुई इस हरकत से साधु-संतों ने कड़ी नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे गंगा का अपमान करार दे रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

प्रदूषण और नागरिक जिम्मेदारी पर बहस यह वीडियो ऑनलाइन बहस का मुद्दा बन गया है। जहां अधिकांश लोग इसे धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ मानते हैं, वहीं कुछ का तर्क है कि नदियों को डस्टबिन समझना भारत में गिरती नागरिक समझ का प्रमाण है। कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या हम नदियों को बचाने के प्रति वाकई गंभीर हैं, या सिर्फ धर्म के चश्मे से ही प्रदूषण को देखते हैं।

वाराणसी केस से जुड़ी यादें यह घटना वाराणसी में हाल ही में हुए एक विवाद की याद दिलाती है, जहाँ इफ्तार पार्टी की बची हुई बिरयानी गंगा में फेंकने पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में उन्हें यह कहते हुए जमानत दे दी कि आरोपियों ने माफी मांगी है और वे भविष्य में ऐसी हरकत नहीं दोहराएंगे।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल फिलहाल हरिद्वार पुलिस की ओर से इस मामले में किसी आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लगातार पुलिस प्रशासन को टैग कर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि गंगा पहले ही औद्योगिक कचरे और सीवेज से जूझ रही है, ऐसे में इस तरह की मानवीय लापरवाही नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक नुकसान पहुंचा रही है।

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