अफगान अस्पताल पर बमबारी करने वाले हमें ज्ञान न दें , UNSC में भारत ने पाकिस्तान का नकाब उतारा
News Image

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बुधवार को सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा विषय पर हुई खुली बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में आईना दिखाया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड पर जमकर निशाना साधा।

आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा राजदूत पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि भारत सीमा पार आतंकवाद का दशकों से शिकार रहा है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो देश खुद आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की पुरजोर वकालत की।

अफगान अस्पताल पर हमले का मुद्दा बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पाखंड की पोल खोलते हुए अफगानिस्तान का उदाहरण दिया। राजदूत ने याद दिलाया कि इसी साल मार्च में, रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान ने काबुल स्थित उमीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर बर्बर हवाई हमला किया था। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सा सुविधा को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का घोर उल्लंघन है और इसे किसी भी सैन्य तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।

1971 के नरसंहार का जिक्र पाकिस्तान की आलोचना करते हुए भारत ने उसके दागदार इतिहास की भी याद दिलाई। राजदूत हरीश ने कहा कि पाकिस्तान का नरसंहार का इतिहास बहुत पुराना है। उन्होंने 1971 में बांग्लादेश में हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस देश का अतीत ऐसे काले कारनामों से भरा हो, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

नागरिकों की सुरक्षा पर भारत की जीरो टॉलरेंस भारत ने अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह नागरिकों की जान के नुकसान के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति का समर्थन करता है। भारत ने चिंता जताई कि शहरी इलाकों में विस्फोटक हथियारों और ड्रोन का इस्तेमाल नागरिकों की जान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

मानवीय कानूनों का पालन जरूरी भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के केंद्र में नागरिकों की सुरक्षा होनी चाहिए। भारत ने जोर दिया कि संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को चिकित्सा कर्मियों और मानवीय सहायता पहुंचाने वालों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सम्मान करना चाहिए।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

अलवर: कार बनी बच्चों की कब्र, खेलते-खेलते अंदर फंसीं दो सगी बहनें, दम घुटने से मौत

Story 1

होटल में CSK फैन को देख खिलखिलाए विराट कोहली, वीडियो हुआ वायरल

Story 1

दिल्ली में तीन दिन का चक्का जाम : ऑटो-टैक्सी से लेकर ट्रकों तक की हड़ताल, जानें क्या है असर

Story 1

1983 वर्ल्ड कप का वायरल बिल फर्जी: कीर्ति आजाद ने खोली पोल, बताया क्यों है यह झूठ

Story 1

दम है तो रोक कर दिखाओ : बकरीद से पहले हुमायूं कबीर ने विवादित बयान देकर सरकार को दी चुनौती

Story 1

पश्चिम बंगाल: मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य, विवादों के घेरे में सरकार का बड़ा फैसला

Story 1

क्यूबा पर ट्रंप का बड़ा दांव: 30 साल पुराने मर्डर केस में राउल कास्त्रो को घेरा, युद्ध जैसे हालात?

Story 1

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का फाइनल राउंड : जल्द होगी बड़ी घोषणा, मार्को रुबियो की PM मोदी से होगी मुलाकात

Story 1

सलाद के पैकेट में मिला सरप्राइज , खोलते ही बाहर निकला जिंदा मेंढक!

Story 1

CBSE का OSM सिस्टम सवालों के घेरे में: धुंधली कॉपियां मिलने के बाद छात्रों का फूटा गुस्सा, बोले- अब तो सबूत भी हैं