मंगल की रफ्तार और अरबों का खजाना: NASA का साइकी मिशन कैसे बदल देगा अंतरिक्ष विज्ञान?
News Image

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का साइकी स्पेसक्राफ्ट इन दिनों चर्चा में है। यह यान अपनी लंबी यात्रा के दौरान मंगल ग्रह के बेहद करीब से गुजरा, जिसने न केवल शानदार तस्वीरें भेजीं, बल्कि अपनी गति में भी आश्चर्यजनक इजाफा किया है।

क्या है मंगल का धक्का ? 15 मई को साइकी स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह से करीब 4,500 किलोमीटर की दूरी से गुजरा। इस दौरान यान की गति लगभग 19,848 किमी प्रति घंटा थी। मंगल के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव का इस्तेमाल कर स्पेसक्राफ्ट ने खुद को ग्रैविटी असिस्ट दिया, जिससे उसे 1,600 किमी प्रति घंटा (1,000 मील प्रति घंटा) की अतिरिक्त रफ्तार मिली। यह गति अब इसे इसके अंतिम लक्ष्य यानी साइकी क्षुद्रग्रह तक पहुँचाने में मदद करेगी।

धातुओं का अद्भुत भंडार साइकी क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी प्राचीन आदि-ग्रह (protoplanet) का बचा हुआ धात्विक केंद्र है। इसमें लोहा, निकेल और सोने जैसे बहुमूल्य धातुओं का ऐसा भंडार है, जिसकी कुल कीमत पूरी दुनिया की जीडीपी से 80 गुना अधिक आंकी गई है। हालांकि, नासा का यह मिशन स्पेस माइनिंग के लिए नहीं, बल्कि ग्रहों के निर्माण को समझने के लिए है।

पृथ्वी के रहस्य का समाधान पृथ्वी का आंतरिक केंद्र (कोर) अत्यधिक गर्म और गहरा है, जिसे सीधे तौर पर देखना असंभव है। साइकी यान इस क्षुद्रग्रह का अध्ययन कर उन अनसुलझे रहस्यों को उजागर करेगा कि कैसे हमारे सौर मंडल के चट्टानी ग्रह पिघली हुई धातु के कोर के चारों ओर निर्मित हुए। यह मिशन सौर मंडल की उत्पत्ति का एक नया अध्याय लिख सकता है।

2029 में पूरी होगी मंजिल एक छोटी वैन के आकार का यह यान अक्टूबर 2023 में लॉन्च किया गया था। अगस्त 2029 तक इसके अपने गंतव्य पर पहुँचने की उम्मीद है, जहाँ यह 26 महीनों तक क्षुद्रग्रह की परिक्रमा करेगा। इस दौरान यान अपने आधुनिक उपकरणों से इसका चुंबकीय क्षेत्र, चट्टानी बनावट और गुरुत्वाकर्षण शक्ति को स्कैन करेगा।

क्या है साइकी का इतिहास? 1852 में खोजा गया यह क्षुद्रग्रह ग्रीक पौराणिक कथाओं की आत्मा की देवी के नाम पर रखा गया है। अपने सबसे चौड़े बिंदु पर यह 279 किमी का विशालकाय पिंड है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि शुरुआती सौर मंडल में हुई भयानक टक्करों के कारण इस ग्रह का बाहरी हिस्सा नष्ट हो गया और केवल इसका धात्विक केंद्र शेष रह गया। पहली बार कोई मानव-निर्मित यान इस अनोखी खगोलीय चट्टान के इतने करीब जाकर इसके रहस्यों से पर्दा उठाएगा।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

बेंच पर बैठने का दर्द और फिर प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड: मनीष पांडे की वापसी की कहानी

Story 1

पेट्रोल की शराबी : चाय-कॉफी की जगह पेट्रोल पीती है ये लड़की, जानकर दंग रह जाएंगे आप

Story 1

ईरान के बाद अब ट्रंप का अगला टारगेट क्यूबा? कैरेबियन सागर में तैनात हुआ घातक अमेरिकी युद्धपोत

Story 1

तमिलनाडु में विजय का मास्टरस्ट्रोक : कैबिनेट में 23 नए मंत्रियों की एंट्री, कांग्रेस की 6 दशक बाद वापसी

Story 1

थिएटर्स में महा-धमाका: दृश्यम 3 देख झूम उठे फैंस, सोशल मीडिया पर सस्पेंस का तूफान

Story 1

केदारनाथ यात्रा: फिर टूटा पहाड़, 10 हजार श्रद्धालु फंसे; जानें बाबा केदार के दर्शन के लिए कैसे रहें सुरक्षित

Story 1

झुलसाने वाली गर्मी: बांदा में पारा 48 डिग्री के पार, 8 राज्यों में भीषण लू का अलर्ट

Story 1

ईरान नीति पर ट्रंप और नेतन्याहू में तकरार: क्या टूटने की कगार पर है अमेरिका-इजरायल का तालमेल?

Story 1

पापा, ये मुझे मार डालेंगे... शादी के 3 महीने बाद दहेज की बलि चढ़ी 19 साल की मासूम

Story 1

दिल्ली की रफ्तार थमने को तैयार: आज से तीन दिनों के लिए ऑटो-टैक्सी और ट्रकों का चक्का जाम