अब इलेक्ट्रिक दौड़ेंगी महाराष्ट्र की लाइफलाइन : 2036 तक एसटी का कायाकल्प, जानिए क्या है सरकार का प्लान
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महाराष्ट्र की सड़कों पर जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (ST) की सभी बसें भविष्य में इलेक्ट्रिक होंगी। डीजल की बढ़ती कीमतों और बढ़ते घाटे से निपटने के लिए सरकार ने 2036 तक का एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है।

2036 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक फ्लीट प्रोग्रेसिव महाराष्ट्र कॉन्क्लेव में बोलते हुए मंत्री सरनाईक ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से एसटी बसों को इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। उनका लक्ष्य है कि 2036 तक एसटी के बेड़े में एक भी ऐसी बस न हो जो इलेक्ट्रिक न हो। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा, बल्कि डीजल पर होने वाले भारी खर्च को भी नियंत्रित करेगा।

रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य कॉन्क्लेव के दौरान सरनाईक ने एक कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में व्यवसाय करने वाले सभी रिक्शा और टैक्सी चालकों को व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य है। ऐसे चालकों को सीखने के लिए 110 दिन का समय दिया गया है। समयसीमा खत्म होने के बाद नियम का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मराठी को लेकर राजनीति पर दो टूक मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल हिंदी भाषी चालकों के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण भारत और गुजरात सहित सभी बाहरी राज्यों के ड्राइवरों के लिए है। उन्होंने कहा कि लोग इसे सिर्फ हिंदी बनाम मराठी की राजनीति बना रहे हैं, जबकि यह निर्णय यात्रियों और चालकों के बेहतर संवाद के लिए लिया गया है।

क्या बढ़ेगा एसटी का किराया? ईंधन के बढ़ते दामों पर चिंता जताते हुए मंत्री ने स्वीकार किया कि इससे एसटी निगम पर सालाना 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अप्रैल 2026 में ही निगम को करीब 76 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। उन्होंने संकेत दिए कि यात्रियों को राहत देने के साथ-साथ निगम की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भविष्य में किराए में बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है।

घाटे से निपटने के लिए नई रणनीति फिलहाल सरकार टिकट के दामों के अलावा अन्य विकल्पों पर भी काम कर रही है। इसमें नई इलेक्ट्रिक बसों की खेप (8 हजार बसें) शामिल करना, परिचालन खर्च में कटौती करना और रेवेन्यू बढ़ाने के नए रास्ते तलाशना मुख्य प्राथमिकता है। सरकार का प्रयास है कि जनता पर आर्थिक बोझ कम से कम पड़े और एसटी की सेवा सुचारू बनी रहे।

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