दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का हालिया बयान कि खंडित मूर्तियों को कूड़े में न फेंकें, सरकार को दें, हम कलेक्शन सेंटर बनाएंगे , सुनने में एक साधारण प्रशासनिक फैसला लग सकता है। लेकिन राजनीति के गलियारों में इसे बीजेपी की एक सोची-समझी और गहरी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
आस्था के निजी कोनों में पैठ बीजेपी अब सिर्फ बड़े मंदिरों या अयोध्या तक सीमित नहीं है। पार्टी की नजर अब हर हिंदू घर के उस छोटे से कोने पर है, जहां भगवान विराजमान हैं। अक्सर घरों में मूर्तियां खंडित होने पर लोग दुविधा में पड़ जाते हैं कि उनका क्या करें। बीजेपी ने इसी भावनात्मक शून्यता को पकड़ा है। सरकार का यह कहना कि भगवान की चिंता मत करो, हम हैं , सीधे जनता के दिल तक पहुंचने का एक अचूक तरीका है।
सड़क से ड्रॉइंग रूम तक का सफर कभी मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा लगाने वाली बीजेपी अब उससे काफी आगे निकल चुकी है। पहले यह आंदोलन सड़कों पर था, फिर भव्य मंदिरों तक पहुंचा और अब यह लोगों के घरों के अंदर तक प्रवेश कर चुका है। यह बीजेपी का माइक्रो-हिंदुत्व है, जो टीवी डिबेट या शोर-शराबे वाली राजनीति के बजाय घर की अलमारी और पूजा की घंटी के जरिए काम करता है।
दिल्ली के आधुनिक मिजाज के अनुकूल दिल्ली जैसे महानगर में, जहां पढ़ा-लिखा मध्यम वर्ग और अपार्टमेंट कल्चर है, वहां भड़काऊ बयानों की जगह सांस्कृतिक चिंता वाली राजनीति ज्यादा असरदार होती है। रेखा गुप्ता की यह पहल सॉफ्ट हिंदुत्व का सटीक उदाहरण है। इसमें न कोई विवाद है और न ही किसी दूसरे धर्म पर हमला। बस एक भावनात्मक जुड़ाव है, जो लोगों को यह महसूस कराता है कि सरकार उनके दैनिक जीवन और आस्था का सम्मान करती है।
प्रशासन नहीं, कल्चरल मैनेजमेंट इस पहल के साथ सरकार और धार्मिक जीवन के बीच की दूरी लगातार कम हो रही है। अब सरकार सिर्फ सड़कें और बिजली नहीं दे रही, बल्कि लोगों की आस्था का संरक्षक भी बन रही है। इसे प्रशासन नहीं, बल्कि कल्चरल मैनेजमेंट कहना बेहतर होगा। जैसे नगर निगम सफाई का काम करता है, वैसे ही अब सरकार खंडित मूर्तियों का सम्मान करेगी।
विपक्ष की बड़ी चूक विपक्ष आज भी बेरोजगारी, महंगाई और संविधान जैसे मुद्दों पर टिका है, जबकि बीजेपी ने चुनाव को भावनात्मक रिश्तों की भाषा में बदल दिया है। अगर विपक्ष इसे केवल एक छोटा सा मूर्ति कलेक्शन कार्यक्रम मान रहा है, तो यह उनकी बड़ी भूल हो सकती है। बीजेपी अब महज वोटर्स नहीं, बल्कि जनता के साथ एक ऐसा भावनात्मक रिश्ता बनाना चाहती है, जिसमें हर छोटे-बड़े धार्मिक क्षण में सरकार का अस्तित्व महसूस हो।
रेखा गुप्ता का यह बयान आने वाले समय की उस राजनीति का ट्रेलर है, जहां बीजेपी हर घर के पूजा घर तक अपनी उपस्थिति अनिवार्य करना चाहती है।
*We’re launching dedicated centers to respectfully recycle our cherished idols, a heartfelt step toward a cleaner, culturally mindful Viksit Delhi.
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) May 19, 2026
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Public participation makes every good initiative stronger. Share your ideas, and let’s honour faith… pic.twitter.com/kY0AiQGwdm
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