सड़क पर नमाज पर योगी के समर्थन में उतरे मुफ्ती, कहा- सीएम एक संत हैं, उनकी बात सही है
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज न पढ़ने वाले बयान पर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। इसी बीच उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मुफ्ती शमून कासमी ने योगी के रुख का खुलकर समर्थन किया है।

योगी एक संत हैं, उनकी बात तार्किक मुफ्ती शमून कासमी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सीएम योगी एक संत हैं और उन्हें धर्म का गहरा ज्ञान है। उन्होंने कहा, सीएम योगी ने सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर जो सलाह दी है, मैं उसका पूरी तरह समर्थन करता हूं। एक संत के तौर पर वे न सिर्फ अपने धर्म को समझते हैं, बल्कि अन्य धर्मों के प्रति भी जागरूक हैं।

सड़कों पर नमाज से आमजन को परेशानी कासमी ने तर्क दिया कि सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्तियों पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर नमाज पढ़ने से यातायात बाधित होता है। एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता रुकना गंभीर समस्या बन सकता है, जिससे मरीजों की जान जाने का खतरा रहता है।

शिफ्ट में नमाज पढ़ने का सुझाव सही योगी आदित्यनाथ के उस सुझाव पर, जिसमें उन्होंने मस्जिद में जगह कम होने पर शिफ्ट में नमाज पढ़ने की बात कही थी, कासमी ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस्लाम के जानकारों को इस सलाह पर गंभीरता से सोचना चाहिए। यह एक व्यावहारिक रास्ता है जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं भी आहत नहीं होंगी और जनहित का भी पालन होगा।

उत्तराखंड का उदाहरण और धामी सरकार की पहल मुफ्ती कासमी ने उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सड़कों पर नमाज पढ़ने की प्रथा को नियंत्रित किया गया है। उन्होंने धामी सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिए वहां विशेष अथॉरिटीज बनाई गई हैं। इससे मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और जैन समुदाय के बच्चे आईएएस-आईपीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार हो रहे हैं।

योगी की सख्त हिदायत गौरतलब है कि सीएम योगी ने बकरीद के मौके पर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सड़कों पर नमाज न पढ़ी जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि अगर लोग प्यार से समझ जाते हैं तो बेहतर है, वरना प्रशासन दूसरा तरीका अपनाने में हिचकिचाएगा नहीं।

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