हाल के दिनों में ईरान और वैश्विक राजनीति के बीच बदलते समीकरणों के बीच, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा साझा किए गए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। इस वीडियो में ईरान के बंदर अब्बास शहर में स्थित एक प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर की झलक है, जिसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि एक इस्लामिक देश में हिंदू विरासत का यह संगम कैसे संभव हुआ?
क्या है इस मंदिर का इतिहास? बंदर अब्बास का यह विष्णु मंदिर किसी राजा ने नहीं, बल्कि 19वीं सदी के अंत में वहां रहने वाले भारतीय व्यापारियों ने बनवाया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 1888 में भारतीय व्यापारियों को इसके निर्माण की अनुमति मिली और 1892 में कजर युग के दौरान यह बनकर तैयार हुआ। उस दौर में यह न केवल पूजा का केंद्र था, बल्कि ईरान में रहने वाले भारतीयों के लिए मिनी इंडिया की तरह एक सामाजिक मिलन स्थल था।
वास्तुकला का अनोखा संगम मंदिर की बनावट बेहद दिलचस्प है। इसकी वास्तुकला में भारतीय और फ़ारसी शैलियों का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। मंदिर का केंद्रीय गुंबद इस्लामी मस्जिद शैली से प्रेरित है, जबकि बाहरी दीवारों पर बनी हिंदू आकृतियां और 72 छोटे बुर्ज भारतीय प्रभाव को दर्शाते हैं। इसे मूंगा पत्थर, मिट्टी और चूने से बनाया गया था, जो उस दौर के कारीगरों की तकनीकी कुशलता का प्रमाण है।
आज किस हाल में है मंदिर? वर्तमान में यह मंदिर पूजा के लिए तो सक्रिय नहीं है, लेकिन ईरान के सांस्कृतिक विरासत विभाग ने इसे एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक का दर्जा दिया हुआ है। मंदिर की वास्तुकला ऐसी है कि गर्भगृह में सूरज की रोशनी सीधे पहुंचती है। यह भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों का एक जीवित प्रमाण बना हुआ है।
ईरान में हिंदू समुदाय की मौजूदगी अमिताभ बच्चन की पोस्ट के बाद लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या ईरान में आज भी हिंदू रहते हैं? पीयू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, ईरान में लगभग 20,000 हिंदू रहते हैं, जिनमें से अधिकांश गुजरात से जुड़े व्यापारी परिवार हैं। इसके अलावा, ईरान के जाहेदान प्रांत में एक आर्य समाज मंदिर भी मौजूद है, जो यह साबित करता है कि दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव काफी गहरा रहा है।
क्या यह मंदिर अकेला है? बंदर अब्बास का विष्णु मंदिर ही ईरान में एकमात्र हिंदू पहचान नहीं है। जाहेदान स्थित आर्य समाज मंदिर और विभिन्न ऐतिहासिक साक्ष्य यह स्पष्ट करते हैं कि ईरान की विविधता महज एक शब्द नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति का हिस्सा है। यह मंदिर आज भी दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच के उस सौहार्दपूर्ण रिश्ते की याद दिलाता है, जो व्यापार और विश्वास की नींव पर टिका था।
T 5744(i) - The Ancient Hindu Vishnu Temple in Abbas Bandar, Iran .. Built in 1892 during the Qajar era .. pic.twitter.com/rVYyodojeq
— Amitabh Bachchan (@SrBachchan) May 17, 2026
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