नई दिल्ली: हाल ही में तेल और गैस की कीमतों में हुई आंशिक बढ़ोतरी के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। भाजपा नेताओं ने वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों की तुलना करते हुए दावा किया है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत में आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा है।
वैश्विक संकट और भारत की स्थिति भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट के कारण ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहा। इसका खामियाजा दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को भुगतना पड़ा, लेकिन भारत एक अपवाद के रूप में उभरा।
अन्य देशों के मुकाबले भारत की स्थिति आंकड़ों पर गौर करें तो 23 फरवरी से 15 मई के बीच अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 44.5% और डीजल की 48.1% बढ़ीं। इसी अवधि में पाकिस्तान में पेट्रोल 54.9% महंगा हुआ। म्यांमार जैसे देशों में तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 89% से लेकर 112% तक का भारी उछाल आया। इसके विपरीत, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल 3.2% से 3.4% की ही वृद्धि की गई।
तेल कंपनियों ने सोखा झोंका भाजपा ने स्पष्ट किया कि यह राहत अपने आप नहीं मिली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ जनता पर डालने के बजाय खुद वहन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनियों को इस दौरान प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी (नुकसान) हुई, ताकि 76 दिनों तक आम आदमी को महंगाई से बचाया जा सके।
कांग्रेस पर बरसी भाजपा तेल की कीमतों को लेकर कांग्रेस द्वारा की जा रही आलोचना पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस हर वैश्विक संकट में राजनीतिक अवसर तलाशती है। उन्होंने कहा, कांग्रेस को हर चीज का राजनीतिकरण करने पर शर्म आनी चाहिए। यह आर्थिक राष्ट्रभक्ति का समय है, जब सरकार पूरी तरह से महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी है।
महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश भाजपा का तर्क है कि ईंधन की कीमतें केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनका सीधा असर माल ढुलाई, खाद्य वस्तुओं और निर्माण लागत पर पड़ता है। भारत सरकार ने ईंधन के दाम नियंत्रित रखकर वास्तव में महंगाई को काबू में रखा है। भाजपा के अनुसार, असली कहानी 3 रुपये की वृद्धि नहीं, बल्कि अन्य देशों के मुकाबले भारत द्वारा कीमतों में की गई सीमित बढ़ोतरी है।
पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी उछाल आया है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बंद होने और तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इसका असर दुनिया की लगभग हर… pic.twitter.com/CgyqHIsbOL
— Amit Malviya (@amitmalviya) May 15, 2026
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