जेल का नाम सुनते ही जहन में बंद दीवारों, सख्त पहरे और पाबंदियों की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन अब हैदराबाद में एक ऐसी पहल शुरू हुई है, जो आपको इन दीवारों के ठीक उस पार ले जाएगी। चंचलगुडा सेंट्रल जेल परिसर में Feel the Jail नाम का एक अनोखा अनुभव केंद्र बनाया गया है।
कैसा है जेल का अनुभव? यहाँ आने वाले लोग केवल जेल को देख ही नहीं पाएंगे, बल्कि उसे महसूस भी कर सकेंगे। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला द्वारा उद्घाटन किए गए इस केंद्र में वैसी ही कोठरियां बनाई गई हैं, जैसी असली जेलों में होती हैं। इसमें रहने के लिए आपको एक कैदी की तरह साधारण बिस्तर, स्टील के बर्तन और सीमित सुविधाओं के बीच वक्त बिताना होगा।
क्या है इसका उद्देश्य? इस पहल का मकसद केवल रोमांच पैदा करना नहीं है। स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन (SICA) के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि जेल व्यवस्था में समय के साथ क्या बदलाव आए हैं। यह एक शैक्षणिक प्लेटफॉर्म है, जहां से लोग कानून, अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
इतिहास और सुधार की झलक म्यूजियम में केवल वर्तमान जेल जीवन ही नहीं, बल्कि इसका अतीत भी मौजूद है। यहाँ निजाम काल की जेल व्यवस्था से लेकर नागार्जुन सागर बांध निर्माण में कैदियों के योगदान को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही, कवि दाशरथी कृष्णमाचार्युलु और भक्त रामदासु जैसे प्रसिद्ध हस्तियों की जेल यात्राओं का जिक्र भी यहां मिलता है।
सजा नहीं, सुधार का केंद्र राज्यपाल ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि आधुनिक जेलों का स्वरूप अब बदल रहा है। उनका मानना है कि जेल केवल सजा देने की जगह नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सुधार का केंद्र होनी चाहिए। यहां कैदियों को दिए जाने वाले कौशल प्रशिक्षण और उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों का प्रदर्शन यह दिखाता है कि जेल अब बदला लेने की नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत करने की जगह बन रही हैं।
युवाओं के लिए एक सीख यह म्यूजियम युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण जगह साबित हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, यह स्थल पर्यटन के साथ-साथ रिसर्च और जागरूकता का एक बड़ा मंच बनेगा। Feel the Jail कार्यक्रम का अनुभव लोगों को यह अहसास कराएगा कि आजादी कितनी कीमती है और अनुशासनहीनता का परिणाम क्या हो सकता है।
🚨 Hyderabad s Central Jail has launched Feel the Jail , a paid initiative where citizens can experience prison life for 12 or 24 hours.
— Gems (@gemsofbabus_) May 13, 2026
Priced at ₹1,000 and ₹2,000 respectively, the programme includes recreated prison barracks, prison-style meals and regulated routines. pic.twitter.com/aCMWsACepI
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