बीजिंग में गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक वैश्विक राजनीति के लिहाज से गेम चेंजर साबित हुई है। ईरान और ऊर्जा संकट के साए में हुई इस वार्ता ने वैश्विक स्थिरता को लेकर नई दिशा तय की है।
हॉर्मुज जलसंधि: ऊर्जा सुरक्षा पर बनी आम सहमति दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। अमेरिका और चीन ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुचारू रखने के लिए इस समुद्री मार्ग को हर हाल में खुला रखा जाएगा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मार्ग के सैन्यीकरण और किसी भी प्रकार के टोल या टैक्स वसूली के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है। अपनी ऊर्जा निर्भरता को संतुलित करने के लिए चीन ने अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
ईरान को परमाणु मुक्त रखने का कड़ा संदेश बढ़ते तनाव के बीच दोनों महाशक्तियों ने एक स्वर में ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप और जिनपिंग इस बात पर पूरी तरह एकमत हैं कि ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। साझा बयान ने तेहरान पर कूटनीतिक दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है।
द्विपक्षीय संबंधों का नया विजन बैठक को शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए नया विजन करार दिया है। दोनों देशों ने अगले तीन वर्षों के लिए एक स्थिर और रचनात्मक संबंध बनाने का संकल्प लिया है। वार्ता के दौरान अमेरिकी व्यवसायों के लिए चीनी बाजार खोलने, अमेरिकी उद्योगों में चीनी निवेश बढ़ाने और फेंटेनाइल (नशीले पदार्थ) की तस्करी पर लगाम लगाने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है।
ताइवान मुद्दे पर चीन की सख्त चेतावनी मुलाकात सुखद रही, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर शी जिनपिंग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने ताइवान को चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील बिंदु बताया। चीनी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यदि ताइवान के मामले को सावधानी से नहीं संभाला गया, तो यह गंभीर संघर्ष का कारण बन सकता है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
शांति की राह और वैश्विक चुनौतियां ईरान और हॉर्मुज जलसंधि का विवाद वर्तमान में वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति वार्ता की सबसे बड़ी बाधा है। ऐसे में अमेरिका और चीन का एक साथ आना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह बीजिंग समझौता केवल कागजों तक सीमित रहेगा या जमीन पर शांति स्थापित करने में सफल होगा।
From the Bilateral Meeting in Beijing:
— The White House (@WhiteHouse) May 14, 2026
President Trump had a good meeting with President Xi of China. pic.twitter.com/WaH8hR1ZV3
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