सर्जिकल स्ट्राइक एक्सपर्ट डॉ. इंद्रनील खान: कैसे एक डॉक्टर ने ढहाया टीएमसी का 25 साल पुराना अभेद्य किला ?
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने कोलकाता की बेहाला पश्चिम सीट पर एक ऐसा इतिहास रचा है, जिसकी चर्चा पूरे देश में है। 25 साल से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गढ़ रही इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के 37 वर्षीय युवा डॉक्टर, इंद्रनील खान ने जोरदार दस्तक दी है।

कौन हैं डॉ. इंद्रनील खान?

पेशे से क्लिनिकल ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) डॉ. इंद्रनील खान ने उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और मेडिकल कॉलेज कोलकाता से एमडी की पढ़ाई की है। छात्र जीवन से ही एबीवीपी (ABVP) से जुड़े रहे डॉ. खान को उनके प्रखर व्यक्तित्व और बौद्धिक क्षमता के लिए जाना जाता है। वे बंगाल की राजनीति में एक नए और पढ़े-लिखे चेहरे के रूप में उभरे हैं।

कैसे ढहाया 25 साल का टीएमसी का किला?

बेहाला पश्चिम सीट लंबे समय से पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का अभेद्य किला रही थी। लेकिन शिक्षक भर्ती घोटाले ने जनता को अंदर तक झकझोर दिया था। टीएमसी ने इस बार पार्थ चटर्जी की जगह शोभन चटर्जी की पत्नी रत्ना चटर्जी को मैदान में उतारा, लेकिन जनता ने पति-पत्नी और वो के राजनीतिक ड्रामे को खारिज कर दिया। डॉ. खान ने करीब 25,000 वोटों के अंतर से इस सीट पर जीत दर्ज की और क्षेत्र के सभी 10 वार्डों में बीजेपी का परचम लहराया।

घर-घर जाकर बदली हवा

जीत का श्रेय डॉ. खान की कड़ी मेहनत को जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने रोजाना औसतन 15 किलोमीटर पैदल यात्रा की और सीधे मतदाताओं से संवाद किया। उनकी शालीनता और पेशेवर छवि ने भ्रष्टाचार से त्रस्त आम जनता के बीच उन्हें एक भरोसेमंद विकल्प बना दिया। अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे दिग्गज नेताओं के रोड शो ने भी उनकी दावेदारी को और मजबूत किया।

डॉक्टर बाबू का अब क्या है मिशन?

विधायक बनने के बाद डॉ. खान ने साफ कर दिया है कि उनका लक्ष्य व्यवस्था परिवर्तन है। एक डॉक्टर होने के नाते उनकी पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प करना है। वे विद्यासागर स्टेट जनरल अस्पताल को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करना चाहते हैं। इसके अलावा, बेहाला की दशकों पुरानी जलभराव की समस्या के लिए वे ड्रेनेज सिस्टम को अपग्रेड करने पर काम शुरू कर चुके हैं।

अपराधियों को साफ चेतावनी

पदभार संभालते ही डॉ. खान ने प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अपराधियों का कोई राजनीतिक रंग नहीं होता, इसलिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को लेकर भी वे सख्त रुख अख्तियार किए हुए हैं। डॉ. खान की यह जीत संकेत देती है कि बंगाल की राजनीति में अब प्रोफेशनल्स और स्वच्छता की मांग जोर पकड़ रही है।

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