पश्चिम एशिया संकट के बीच राजनाथ सिंह का आश्वासन: घबराएं नहीं, देश में जरूरी सामान की कोई कमी नहीं
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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू बाजार इससे अछूता रहेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि किसी भी जरूरी वस्तु की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी।

पैनिक न करें, सरकार पूरी तरह मुस्तैद हाल ही में मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर स्थिति स्पष्ट की। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार वैश्विक संघर्ष के चलते ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की चेन पर पड़ने वाले असर की बारीकी से निगरानी कर रही है। उन्होंने जनता से किसी भी तरह की पैनिक बाइंग या घबराहट से दूर रहने की अपील की है।

आयात कम करने के लिए पीएम मोदी की अपील सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के व्यापक मिशन पर काम कर रही है। इसी के चलते प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया है। सोना आयात करने से विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव बढ़ता है, जिसे वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में बचाना देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ईंधन बचाने का संकल्प ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच आर्थिक मोर्चे पर आत्मनिर्भरता के लिए ईंधन का संयमित उपयोग अनिवार्य है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना सीधे तौर पर देश के आयात बिल को कम करेगा। रक्षा मंत्री ने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम बताया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट संदेश पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी जनता की चिंताओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में कहीं भी ईंधन या गैस के ड्राई आउट होने जैसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार हर नागरिक तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सामूहिक भागीदारी से ही सुरक्षा संभव वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकारी नीतियों के साथ नागरिक सहयोग भी जरूरी है। ऊर्जा संरक्षण और गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाकर ही भारत कठिन अंतरराष्ट्रीय हालातों के बीच खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित और सुदृढ़ बनाए रख सकता है।

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