व्हाइट हाउस में गूंजी ॐ शांति : अमेरिका के शक्ति केंद्र में हिंदू प्रार्थनाओं का संदेश
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वॉशिंगटन: अमेरिका के व्हाइट हाउस में आयोजित नेशनल डे ऑफ प्रेयर इस बार बेहद खास रहा। दुनिया भर में जारी तनावपूर्ण स्थितियों के बीच, अमेरिका के गलियारों में प्राचीन हिंदू शांति मंत्रों की गूंज सुनाई दी। इस कार्यक्रम में BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) के एक स्वयंसेवक ने भाग लिया और पूरे विश्व में शांति व एकता के लिए प्रार्थना की।

ॐ शांति से गूंजा व्हाइट हाउस

प्रार्थना सत्र के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला। BAPS स्वयंसेवक ने उपस्थित लोगों से आंखें बंद कर हाथ जोड़ने का आग्रह किया। इसके बाद उन्होंने शांति मंत्र का उच्चारण करते हुए कहा, आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल और सभी जीवों में शांति हो। प्रकृति और पर्यावरण से लेकर स्वर्ग तक, यह शांति पूरे ब्रह्मांड में फैल जाए। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर भी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति की कामना की।

अमेरिका के 250वें वर्ष का संकल्प

यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका अपनी स्वतंत्रता के 250वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है। अपनी प्रार्थना के अंत में, स्वयंसेवक ने BAPS समुदाय, न्यू जर्सी स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम और अपने गुरु, गुरु हरि मोहन स्वामी महाराज की ओर से व्हाइट हाउस का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन अमेरिका में बढ़ती धार्मिक विविधता और समावेशिता का प्रतीक माना जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेशनल डे ऑफ प्रेयर पर अपने संदेश में आस्था के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, आज हम अमेरिका की प्रार्थना और ईश्वर में विश्वास की पुरानी परंपरा का सम्मान कर रहे हैं। जब हम आजादी के 250 गौरवशाली वर्षों का जश्न मना रहे हैं, हमें ईश्वर द्वारा दिए गए आशीर्वादों को कभी नहीं भूलना चाहिए।

ट्रंप ने अपने संबोधन में पश्चिमी सभ्यता और अमेरिका की स्थापना में आस्था की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी सेकंड कॉन्टिनेंटल कांग्रेस ने ईश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए उपवास और आत्मचिंतन का दिन घोषित किया था।

वैश्विक तनाव के बीच क्या है संदेश?

ईरान और मध्य-पूर्व समेत वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और अस्थिरता के बीच व्हाइट हाउस में हुई यह प्रार्थना कई मायने रखती है। जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों के जरिए अमेरिका दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि कठिन समय में भी ईश्वर में आस्था और शांति के साझा मूल्य ही समाज को एकजुट रखने का एकमात्र रास्ता हैं।

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