थलापति विजय का तमिल तख्तापलट : 72 घंटे की सियासी बिसात और 9 मई को CM पद की शपथ
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तमिलनाडु की राजनीति में 8 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय (सी. जोसेफ विजय) ने चेन्नई में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से अपनी तीसरी मुलाकात के बाद सरकार बनाने का औपचारिक निमंत्रण प्राप्त कर लिया है। अब शनिवार, 9 मई को सुबह 11 बजे विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

यह जीत न केवल एक स्टार की लोकप्रियता का प्रमाण है, बल्कि राज्य में पिछले 60 वर्षों से कायम DMK और AIADMK की द्विपक्षीय राजनीति (Dravidian duopoly) के अंत की शुरुआत भी मानी जा रही है।

राज्यपाल से तीसरी मुलाकात: 72 घंटे का जादुई गणित

4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद स्थिति त्रिशंकु थी। TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से 10 सीटें दूर थी।

यह जादुई पल पर्दे के पीछे चल रही 72 घंटे की गहन वार्ताओं का नतीजा था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सक्रियता और विजय के खुद वामपंथी दफ्तरों तक जाकर समर्थन मांगने की रणनीति ने खेल पलट दिया।

सीटों का गणित: किसकी मदद से बनी सरकार?

TVK ने अकेले 108 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बहुमत के लिए कुल 121 विधायकों का समर्थन उनके साथ है:

| पार्टी | सीटें | | :--- | :--- | | TVK (विजय) | 108 | | कांग्रेस | 5 | | CPI | 2 | | CPI(M) | 2 | | VCK | 2 | | IUML | 2 | | कुल समर्थन | 121 |

DMK इस चुनाव में 59 और AIADMK 47 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस के इस फैसले को DMK नेताओं ने इंडिया ब्लॉक के लिए बड़ा झटका बताया है।

चांदी की स्क्रीन से सत्ता के गलियारे तक

थलापति विजय का यह सफर सिनेमा के सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बनने तक का है। अपनी फिल्मों मर्सल , सरकर और लियो के जरिए सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाले विजय ने 2024 में TVK पार्टी की नींव रखी थी।

विजय की जीत का मुख्य आधार युवा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार-विरोध और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे रहे। विशेष रूप से चेन्नई में 16 में से 14 सीटें जीतकर उन्होंने साबित कर दिया है कि उनकी थलापति वेव केवल सिनेमा तक सीमित नहीं है।

शपथ ग्रहण: भव्य तैयारी

9 मई सुबह 11 बजे चेन्नई के नेहरू इंडोर स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व, वामपंथी दलों के शीर्ष नेताओं और लाखों समर्थकों के जुटने की उम्मीद है। शपथ के तुरंत बाद नई सरकार का फोकस युवा रोजगार, शिक्षा नीतियों और राज्य के सामाजिक न्याय एजेंडे पर होगा।

अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या विजय, DMK और AIADMK के प्रभुत्व वाली तमिलनाडु की राजनीति में नई कार्यसंस्कृति ला पाएंगे या नहीं।

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